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चीताखेड़ा । स्थानीय बजरंग मंदिर में विगत 27 वर्षों से चली आ रही गौरवशाली परंपरा के अनुसार, इस वर्ष भी आयोजित तीन दिवसीय नवग्रह अनुष्ठान का कल बुधवार को हवन-पूजन और पूर्णाहूति के साथ भव्य समापन होने जा रहा है। क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और आरोग्य की कामना के साथ आयोजित इस महाअनुष्ठान में देश के विभिन्न अंचलों से आए साधकों ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। *11 विद्वान पंडितों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार* विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित शिवशंकर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस त्रि-दिवसीय नवग्रह अनुष्ठान को 11 उच्च कोटि के विद्वान पंडितों द्वारा पूर्ण विधि-विधान से संपन्न कराया गया। पंडित शर्मा ने बताया कि 9 पंडितों द्वारा नवग्रहों के विशेष मंत्रों का अनुष्ठान और जाप किया जा रहा है और इसी के साथ 2 पंडितों द्वारा क्षेत्र की जनता के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए निरंतर महामृत्युंजय मंत्रों का जाप किया जा रहा है। तीन दिनों के भीतर सभी साधकों ने मिलकर कुल 1 लाख 30 हजार मंत्रों का अनुष्ठान पूरा किया। इसमें भगवान शनि ग्रह के 23 हजार मंत्रों का जाप, गुरु ग्रह के 19 हजार, राहु ग्रह के 18 हजार, केतु ग्रह के 17 हजार, चंद्र ग्रह के 11 हजार, मंगलग्रह के 10 हजार, बुध ग्रह के 9 हजार, सूर्य देव के 7 हजार तथा शुक्र ग्रह के 16 हजार मंत्रों का विधिपूर्वक जाप शामिल है। श्री शर्मा ने बताया है कि आज से 17 साल पहले मात्र 4 साधकों के साथ नवग्रहों का अनुष्ठान शुरू किया था धीरे-धीरे साधक बढ़ते बढ़ते एक कारवां बनता गया। *देशभर से जुटे साधक, दिखी अटूट आस्था*-- इस धार्मिक अनुष्ठान की महिमा इतनी है कि इसमें केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी साधक खिंचे चले आते हैं। इस वर्ष मेरठ, नीमच, छोटीसादड़ी, बरेगन, जीरन, बमोरी, आसपुरा, कराड़िया महाराज, देवियां ग्वाल और हरनावदा सहित कई गांवों के 30 से अधिक मुख्य साधक एक आश्रम के तरह पूरे तीन दिन तक मंत्र साधना में तल्लीन रहे। अनुष्ठान में शामिल होने आए मेरठ के सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर कृष्णपाल त्यागी ने अपनी सह-पत्नी उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपना अद्भुत अनुभव साझा किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा साल 2012 में मैं अपनी बेटी के विवाह को लेकर बेहद चिंतित था। तब सूरत के एक मित्र की सलाह पर मैं पंडित शिवशंकर शर्मा जी के पास चीताखेड़ा आया। उनके बताए शास्त्रोंक्त उपायों और इस अनुष्ठान के पुण्य से मेरी बेटी का विवाह सकुशल संपन्न हुआ। आज वह गुड़गांव में सुखी वैवाहिक जीवन जी रही है और मेरा बेटा अमेरिका में है। इस स्थान की महिमा के कारण ही हम बीते 6 वर्षों से लगातार यहाँ आ रहे हैं, जिससे हमारे जीवन में अपार सुख-शांति है। आज बुधवार को होने वाली अंतिम पूर्णाहुति और महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है, जिसके लिए मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |