भोपाल
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच अखंड हिंदू सेना, मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष शरद जोशी ने इसे राष्ट्र की एकता, सामाजिक समरसता और समान न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है, ऐसे में नागरिक मामलों से जुड़े कानूनों में भी समानता होना समय की आवश्यकता है।
जारी प्रेस वक्तव्य में शरद जोशी ने कहा कि जब देश एक है, संविधान एक है और राष्ट्रीय ध्वज एक है, तो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से संबंधित कानूनों में भी समानता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म, परंपरा या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान न्याय दिलाने का संवैधानिक प्रयास है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभिन्न समुदायों के अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होने के कारण कई बार न्यायिक प्रक्रिया जटिल हो जाती है। यूसीसी लागू होने से कानून व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी तथा महिलाओं और बेटियों को संपत्ति, विवाह और पारिवारिक मामलों में अधिक सुरक्षा और समान अवसर प्राप्त होंगे।
शरद जोशी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में भी राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया है। संविधान निर्माताओं ने इसे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने वाले महत्वपूर्ण लक्ष्यों में शामिल किया था।
अखंड हिंदू सेना का मानना है कि यूसीसी लागू होने से समाज में समानता की भावना मजबूत होगी, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होगी और राष्ट्रीय एकता को नई शक्ति मिलेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस विषय पर सही जानकारी प्राप्त कर सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चा को आगे बढ़ाने की अपील की।
मुख्य बातें
यूसीसी राष्ट्र की एकता और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
महिलाओं और बेटियों को मिलेंगे अधिक अधिकार और सुरक्षा।
न्यायिक प्रक्रिया होगी सरल और पारदर्शी।
संविधान के अनुच्छेद-44 की भावना को मिलेगा बल।
सभी नागरिकों के लिए समान न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने का प्रयास।
"एक राष्ट्र – एक संविधान – एक समान नागरिक कानून" के संदेश के साथ शरद जोशी ने कहा कि "न्याय सबके लिए, अधिकार सबके लिए" ही सशक्त, समरस और एक भारत की आधारशिला है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत