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नेपाल में कुदरत का कहर: ग्लेशियर ढहने से आई विनाशकारी बाढ़, 669 की मौत; करीब 3 हजार लापता काठमांडू। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर के ढहने के बाद आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आए पानी, बर्फ, चट्टानों और मलबे के सैलाब ने रास्ते में आने वाले गांवों, पुलों, सड़कों और निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। कई इलाकों में पूरा बुनियादी ढांचा बर्बाद हो गया है। 669 लोगों की मौत, हजारों अब भी लापता नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार शनिवार तक नेपाल में 669 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 2,426 लोग लापता हैं। तिब्बत में भी सात लोगों की मौत और 554 लोगों के लापता होने की सूचना है। इस तरह पूरी आपदा में करीब 3 हजार लोग अभी भी लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की भी है। पानी की दीवार ने तबाह किया पूरा इलाका बुधवार को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने से अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नदियों में पहुंचा। देखते ही देखते पानी ने भयावह रूप धारण कर लिया। कई स्थानों पर लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। नेपाल के नुवाकोट और रसुवा सहित प्रभावित क्षेत्रों में मकान और सड़कें मलबे में तब्दील हो गईं। तिब्बत की ओर स्थित महत्वपूर्ण ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र में भी भारी तबाही हुई। चीनी बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने के बाद कई जगह केवल तबाही और मलबा दिखाई दिया। सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की चुनौती बाढ़ ने कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी प्रभावित किया है। सैकड़ों श्रमिकों के लापता होने की खबर है। कुछ लोग मलबे से भरी सुरंगों में फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालना बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। नेपाल ने अब भारत और चीन से विशेष तकनीकी सहायता मांगी है, जिसमें सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की तकनीक, जीवित लोगों का पता लगाने वाले उपकरण, डीएनए जांच और शवों के सुरक्षित प्रबंधन की सहायता शामिल है। भारत भी राहत और बचाव अभियान में जुटा आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबरों के बीच भारत ने भी मदद तेज कर दी है। भारत की ओर से विशेष तकनीकी दल भेजे गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार 88 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 287 भारतीयों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। अरबों डॉलर में हो सकता है पुनर्निर्माण का खर्च इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के सामने केवल राहत और बचाव की ही नहीं, बल्कि लंबे पुनर्निर्माण की चुनौती भी खड़ी कर दी है। नेपाल के वित्त मंत्री के अनुसार बर्बाद हुए बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में 4 से 5 अरब डॉलर तक खर्च आने का अनुमान है। हिमालय के लिए बड़ी चेतावनी विशेषज्ञों के लिए यह घटना हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरों की गंभीर चेतावनी है। ग्लेशियरों में बदलाव, अस्थिर पहाड़ी ढलान और अत्यधिक मौसम की घटनाएं हिमालयी देशों के लिए लगातार बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। नेपाल में बचाव अभियान जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों, मलबे और खराब मौसम के कारण हजारों परिवार अब भी अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। |