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आगर मालवा। मातृभाषा दिवस पखवाड़े के अंतर्गत स्थानीय शासकीय महाविद्यालय, नलखेड़ा में एक प्रेरणादायी व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. जी. एल. रावल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में विक्रम विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेमलता चुटेल उपस्थित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में निर्मला कॉलेज ऑफ एजुकेशन, उज्जैन की सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. नेत्रा रावणकर ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे की प्रतिमा पर माल्यार्पण, पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अपने उद्बोधन में डॉ. नेत्रा रावणकर ने मातृभाषा दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए विश्वभर में भाषाओं की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्मिता की पहचान है। अतः हमें अपनी मातृभाषा के प्रति संवेदनशील और सक्रिय रहना चाहिए। मुख्य वक्ता डॉ. प्रेमलता चुटेल ने अपने प्रभावशाली व्याख्यान में हिंदी भाषा के वैज्ञानिक स्वरूप को विस्तार से समझाया। उन्होंने वर्णों के शुद्ध उच्चारण से होने वाले सकारात्मक प्रभाव, मंत्रोच्चार की ऊर्जा तथा भाषा में संवाद और स्वीकार्यता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रेरक शब्दों में कहा कि चाहे अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, दीपक जलाने से कोई रोक नहीं सकता—अर्थात भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. जी. एल. रावल ने वर्तमान समय में उभर रहे भाषाई विवादों पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी भाषाओं के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक क्षेत्रीय भाषाएं सीखने और भाषाई समरसता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभारी डॉ. सर्वेश व्यास ने किया तथा आभार प्रदर्शन स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन के प्रभारी डॉ. सुखदेव बैरागी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. संतोष कुमावत, डॉ. प्रेरणा पाठक, डॉ. सीमा तारे, डॉ. जे. पी. कुल्मी, डॉ. आशीष सांखला सहित महाविद्यालय स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। |