रतलाम / सैलाना
विकास खंड सैलाना के ग्राम पंचायत बोरदा में स्वीकृत तालाब निर्माण कार्य को अचानक निरस्त कर अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। इस निर्णय के विरोध में जिला जनपद उपाध्यक्ष केसु निनामा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण धरने पर बैठ गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बोरदा में रिंगन वाला नाला पर तालाब निर्माण के लिए ₹46.98 लाख की लागत से प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। इस कार्य का वर्चुअली भूमि पूजन (लोकार्पण) स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 फरवरी को किया गया था। इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल सहित क्षेत्रीय सांसद और विधायक भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल थे।
विवाद की जड़: स्वीकृत कार्य का शिफ्टिंग
विवाद तब शुरू हुआ जब वर्तमान सांसद श्रीमती अनीता नागरसिंह चौहान द्वारा जिला पंचायत सीईओ को एक पत्र (क्रमांक 533) जारी किया गया। इस पत्र में उल्लेख किया गया है कि बोरदा में स्वीकृत इस तालाब निर्माण कार्य को भूमि विवाद का कारण बताते हुए निरस्त किया जाए और इसके स्थान पर रतलाम जनपद के ग्राम सरवड़ में पनखेड़ा बैराज निर्माण को स्वीकृति दी जाए।
ग्रामीणों के प्रमुख आरोप और सवाल:
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का अपमान: ग्रामीणों का कहना है कि जिस कार्य का भूमि पूजन देश के प्रधानमंत्री ने किया, उसे स्थानीय राजनीति के चलते निरस्त करना जनता और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
गलत आधार पर निरस्तीकरण: ग्रामीणों ने भूमि विवाद की बात को सिरे से नकारा है। उनका कहना है कि इस तालाब से क्षेत्र का जलस्तर बढ़ता और किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलती।
पक्षपात का आरोप: स्वीकृत बजट को बोरदा (सैलाना जनपद) से हटाकर रतलाम जनपद में स्थानांतरित करने को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
बोरदा की जनता के हक के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिस विकास कार्य की राह ग्रामीण लंबे समय से देख रहे थे, उसे बिना ठोस कारण के निरस्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है। जब तक तालाब का काम वापस शुरू नहीं होता, धरना जारी रहेगा।
— केसु निनामा, जिला जनपद उपाध्यक्ष
फिलहाल धरना स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि सांसद अपने पत्र को वापस लें और बोरदा में तालाब निर्माण का कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए। यदि प्रशासन जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत