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चीताखेड़ा । जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। कंस का पाप बढ़ा और उसने अपने पिता को ही जेल में डाल दिया। यज्ञ - हवन, मंदिर की आरती बंद हो गई, तब पृथ्वी ने गाय का रूप लेकर ब्रह्माजी से प्रार्थना की।भगवान शिव ने भी प्रार्थना की,भगवान नारायण ने कहा कि आप सभी अपने-अपने अंश से शरीर धारण करें। ब्रज में वसुदेव - देवकी ने विवाह किया और वसुदेव देवकी को जेल में डाल दिया। कंस ने 6 पुत्रों की निर्दयता पूर्वक हत्या कर दी और सातवां पुत्र देवकी के गर्भ से रोहिणी मां के गर्भ में स्थापित किया जिससे बलदेव महाराज प्राप्त हुए। आठवें गर्भ के रूप में साक्षात भगवान श्री हरि पधारे, और भगवान गोकुल भगवान नंद यशोदा जी के घर आते हैं, जो दूसरे को आनंद देगा सुख देगा प्रसन्नता देगा उसके घर भगवान आएंगे। ये प्रेरक उद्गार पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आरोग्य देवी आवरी माताजी मंदिर परिसर चीताखेड़ा (माताकाखेडा)में चल रही श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के पांचवें दिन सोमवार को कथाकार पंडित डॉ बबलू वैष्णव जलोदिया केलूखेडा ने व्यक्त किए। भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। दिव्य कथा के दौरान श्रद्धालुओं की उपस्थिति से कारोबार रहा।बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन।रासलीला आत्मा और परमात्मा के मिलन की कथा है उन्होंने कहा कि जीवन को भगवान के साथ जोड़िए। भगवान हर मुसीबत में मदद करते है। भगवान कृष्ण ने बृजवासियों की रक्षा के लिए गिरिराज को धारण किया ,जब इंद्र के द्वारा मूसलाधार बारिश हुई तो भगवान स्वयं गिरिराज को उठाते हैं और बृजवासियों की रक्षा करते हैं। ईश्वर ही हम सब का सच्चा साथी है। भगवान कृष्ण ने सात दिवस तक सात कोस के बड़े भारी पर्वत को अपनी कनिष्टिका उंगली पर धारण किया । रासलीला की कथा कामलीला की कथा नहीं है, रासलीला आत्मा और परमात्मा के मिलन की कथा है। यह जीवन और ब्रह्मा के मिलन वाली कथा है। जैसे दूध और पानी दोनों एक हो जाते हैं, भक्त भगवान में अपना मन लगाए तो ईश्वर रूप हो जाता है। कथा वाचक पंडित डॉ बबलू वैष्णव ने भगवान श्री कृष्ण के दिव्य अवतार एवं उनकी मनमोहक बाल लीलाओं का अत्यंत रसप्रद और भावपूर्ण वर्णन किया। कहा कि ब्रह्म ने माया को पैदा किया ताकि ब्रह्म का विस्तार हो सके। माया ने ब्रह्म को ही ठग लिया और विश्व को स्वयं के वश में कर लिया, सृष्टि की चाल उल्टी हो गई।माया के कारण मन चंचल होता है, मन की चंचलता ही भटकाव है। माया होशियार है, झूठी है, ठगिनी है । जीव को जाल में ऐसे बांधती है कि जीव बंधन को अपनी विजय यात्रा मानकर गोरवान्वित होता जाता है। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन 20 से 27 मई 2026तक प्रतिदिन सुबह 11से दोपहर 3 बजे तक आरोग्य देवी महामाया आवरी माताजी मंदिर परिसर में जनसहयोग से चल रही है। कथा समिति ने समस्त धर्मप्रेमियों से आग्रह किया है कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर कथा श्रवण करें और पुण्य लाभ अर्जित करें। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |