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मित्रता, संस्कृति और अध्यात्म का संगम: श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब हवन-पूजन, महाआरती और भंडारे के साथ साप्ताहिक कथा महोत्सव की भव्य पूर्णाहुति चीताखेड़ा । ग्राम माताकाखेड़ा स्थित आवरी माताजी मंदिर परिसर में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन महोत्सव का बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा वाचक पंडित डॉ. बबलू वैष्णव जलोदिया केलूखेड़ा ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति और मंदिरों से युवा पीढ़ी को जोड़कर रखना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि पाश्चात्य संस्कृति दिनों-दिन समाज पर हावी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि मित्रता दो हृदयों को बांधने वाली प्रेम की पवित्र डोर होती है। सच्चा मित्र जीवन का सौभाग्य होता है, जबकि कपटी मित्र केवल शब्दों में मधुरता दिखाते हैं, लेकिन उनके भावों में छल और विश्वासघात छिपा होता है। उन्होंने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु के बिना मानव जीवन अंधकारमय है और गुरु के मार्गदर्शन के बिना भवसागर पार करना संभव नहीं। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति रस में डूबे नजर आए। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ हवन-पूजन से हुई। मुख्य यजमान के रूप में हरिराम मीणा सहपरिवार ने व्यासपीठ पर पोथी पूजन किया। इसके पश्चात आवरी माताजी मंदिर समिति द्वारा कथा मर्मज्ञ पं. डॉ. बबलू वैष्णव का साल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव की पूर्णाहुति पर हरिराम मीणा परिवार द्वारा विशाल महाप्रसादी एवं सामूहिक स्वभोज (भंडारा) का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इन गणमान्यजनों ने की सहभागिता कार्यक्रम में आवरी माता मंदिर समिति अध्यक्ष मनसुख जैन, उदयपुर के ऊंकार दास, दतिया के रामू सेन ठेकेदार, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश शर्मा, शिवशंकर शर्मा, राजेश जैन, नरेश पाटीदार, भोपालसिंह तोमर, विश्वास शर्मा, नागेश्वर जावरिया, कारुलाल परमार, अशोक जैन, डॉ. जीवन, पूर्व उपसरपंच रतनलाल माली, पुजारी गोपाल रावत, हरिराम मीणा सहित अनेक वरिष्ठजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने व्यासपीठ पर पहुंचकर पोथी पूजन किया तथा पं. डॉ. वैष्णव का साल-श्रीफल भेंट कर सम्मान करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |