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करीब 11,470 करोड़ रुपये की परियोजना से मालवा को मिलेगी नई ऊर्जा, प्रतिदिन 3,000 से अधिक लोगों को मिल रहा रोजगार नीमच : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 जून को नीमच जिले के प्रवास के दौरान ग्राम खिमला पहुंचकर ग्रीनको ग्रुप की निर्माणाधीन 1920 मेगावाट पम्प स्टोरेज परियोजना का साइट निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री परियोजना की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों एवं कंपनी प्रतिनिधियों से निर्माण कार्य की जानकारी लेंगे। करीब 11,470 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही यह महत्वाकांक्षी परियोजना मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी पम्प स्टोरेज परियोजनाओं में शामिल है। इसकी आधारशिला 4 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्चुअल माध्यम से रखी थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस परियोजना को प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि बता चुके हैं। यह परियोजना नीमच, मंदसौर सहित पूरे मालवा क्षेत्र के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगी। 1920 मेगावाट क्षमता और 10,326 मेगावाट-घंटे ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली इस परियोजना से बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और विश्वसनीय होगी। साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। परियोजना के अंतर्गत गांधीसागर के मौजूदा जलाशय को निचले जलाशय तथा ग्रीनको द्वारा निर्मित किए जा रहे नए ऊपरी जलाशय का उपयोग किया जाएगा। पम्प स्टोरेज तकनीक के माध्यम से जल का पुनः उपयोग कर बिजली उत्पादन किया जाएगा, जिससे जल की खपत अत्यंत सीमित रहेगी और पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा। परियोजना में लगभग 420 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन, अत्याधुनिक पेनस्टॉक, नौ रिवर्सिबल फ्रांसिस टरबाइन इकाइयों सहित आधुनिक ऊर्जा अवसंरचना विकसित की जा रही है। निर्माण कार्य लगभग साढ़े तीन वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रामपुरा क्षेत्र की अरावली पहाड़ियों के बीच विकसित हो रही इस परियोजना में प्रतिदिन 3,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। सड़क, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास को भी इससे नई गति मिली है। प्रशासन और ग्रीनको कंपनी के समन्वय से परियोजना का कार्य पारदर्शिता एवं निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये के इस ऊर्जा प्रकल्प से मध्यप्रदेश की विद्युत क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। पम्प स्टोरेज तकनीक के कारण गांधीसागर जलाशय के पानी का पुनर्चक्रण किया जाएगा, जिससे जल की बर्बादी 5 प्रतिशत से भी कम रहेगी। यही विशेषता इस परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल और दीर्घकालिक ऊर्जा समाधान बनाती है। देश की इस सबसे बड़ी पम्प स्टोरेज परियोजना के पूर्ण होने के बाद मध्यप्रदेश ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई मजबूती मिलेगी। |