रतलाम / सरवन। नगर के पिपली चौक में इन दिनों धर्म और भक्ति की ऐसी बयार बह रही है कि पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आ रहा है। यहां आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। कथा वाचक आचार्य श्री विनोद जी शर्मा (भदवासा वाले) के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण एवं सरल शैली में वर्णन किया जा रहा है।
कथा का आयोजन प्रतिदिन रात्रि 7 बजे से किया जा रहा है। जैसे-जैसे कथा का समय नजदीक आता है, पिपली चौक श्रद्धालुओं से भरने लगता है। महिला, पुरुष, युवा एवं बुजुर्ग बड़ी संख्या में कथा पंडाल पहुंचकर भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।
कथा के दौरान आचार्य श्री विनोद जी शर्मा ने श्रीमद्भागवत कथा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि, “भागवत कथा मनुष्य को केवल धार्मिक नहीं बनाती, बल्कि भक्त बनाती है।” उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के जीवन में भक्ति, संस्कार, सदाचार, संयम और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का भाव जागृत होता है। कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसके संदेश को जीवन में उतारने का माध्यम है।
कथा के दौरान आचार्य श्री ने सात महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल एवं सारगर्भित उत्तर बताते हुए श्रद्धालुओं को जीवन के आध्यात्मिक पक्ष से परिचित कराया। वहीं उत्तरा के गर्भ की रक्षा सहित श्रीमद्भागवत के विभिन्न धार्मिक, प्रेरणादायी एवं मार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। प्रसंगों के दौरान कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और वातावरण जयकारों से गूंज उठा।
संगीतमय भजनों, मधुर कथा वाचन और धार्मिक प्रसंगों ने पिपली चौक को मानो भक्ति के तीर्थ में बदल दिया है। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान का स्मरण करते दिखाई देते हैं। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या धार्मिक आयोजनों के प्रति नगरवासियों की आस्था और उत्साह को भी दर्शा रही है।
आयोजकों द्वारा कथा में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सात दिवसीय भागवत कथा के प्रत्येक दिन धार्मिक और आध्यात्मिक संदेशों के साथ श्रद्धालुओं को जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा दी जा रही है। कथा के चलते सरवन का पिपली चौक देर रात तक भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आ रहा है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत