रतलाम। रतलाम ग्रामीण तहसील के चार परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने के विरोध में गुरुवार को जिलेभर के पटवारी लामबंद हो गए। पटवारी संघ के आह्वान पर जिले के सभी पटवारियों ने कलम बंद हड़ताल करते हुए राजस्व संबंधी कामकाज से दूरी बनाई और कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पटवारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर सेवा समाप्ति के आदेश को लेकर अपना आक्रोश जताया।
मामला 7 अक्टूबर को कलेक्टर एवं नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी अजय कटेसरिया द्वारा जारी उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें रतलाम ग्रामीण तहसील में पदस्थ परिवीक्षाधीन पटवारी अंकित गुप्ता, शैलेन्द्र प्रताप राठौड़, सौरभ पुरोहित एवं यशवर्धन शर्मा की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कार्रवाई का आधार परिवीक्षा अवधि में कार्य निष्पादन, निर्धारित दायित्वों के निर्वहन तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन का समग्र मूल्यांकन बताया है।
लेकिन इस कार्रवाई के बाद पटवारी संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संघ का कहना है कि चारों पटवारियों के खिलाफ सीधे सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई, जबकि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। संघ ने कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इसे कर्मचारियों के बीच भय का वातावरण बनाने वाला कदम बताया है।
कलेक्ट्रेट में गूंजते रहे विरोध के नारे
जिला अध्यक्ष गोपाल रावत के नेतृत्व में जिलेभर के पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने धरना देकर विरोध जताया। बड़ी संख्या में पटवारियों की मौजूदगी के चलते कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक विरोध और नारेबाजी का माहौल बना रहा। पटवारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों और चारों पटवारियों की सेवा समाप्ति के मामले में उचित समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
सबसे खास बात यह रही कि धरना-प्रदर्शन के दौरान कोई प्रशासनिक अधिकारी पटवारियों से चर्चा करने मौके पर नहीं पहुंचा। पटवारी अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे रहे, लेकिन उनकी बात सुनने के लिए प्रशासन की ओर से किसी अधिकारी के नहीं पहुंचने को लेकर भी संघ में नाराजगी दिखाई दी।
स्वामित्व योजना बना विवाद की बड़ी वजह
प्रशासन की ओर से जारी आदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत निर्धारित कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं होने और दायित्वों के संतोषजनक निर्वहन का हवाला दिया गया है। वहीं पटवारी संघ का आरोप है कि स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री संबंधी कार्यों को लेकर कर्मचारियों के बीच पहले से असहमति थी और इसी दौरान चार परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई सामने आई है।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई परिवीक्षा संबंधी प्रावधानों और नियुक्ति की शर्तों के तहत की गई है। वहीं संघ इस कार्रवाई की प्रक्रिया और औचित्य पर सवाल उठा रहा है।
जिलेभर के पटवारियों की एकजुटता, कलम बंद हड़ताल और कलेक्ट्रेट में हुए जोरदार प्रदर्शन ने मामले को अब बड़ा प्रशासनिक विवाद बना दिया है। एक तरफ प्रशासन अपने आदेश को कार्य निष्पादन के मूल्यांकन पर आधारित बता रहा है, तो दूसरी तरफ पटवारी संघ इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए आंदोलन के रास्ते पर है। अब देखना होगा कि प्रशासन और पटवारी संघ के बीच यह गतिरोध कब और किस स्तर पर बातचीत से समाप्त होता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत