रतलाम / बाजना। सैलाना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रूपारेल में ₹3 करोड़ 59 लाख 7 हजार की लागत से स्वीकृत सिंचाई तालाब अब राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। तालाब की मांग को लेकर विधानसभा में सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के बीच हुई बातचीत तथा मंत्री के आश्वासन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। विधायक पक्ष का दावा है कि लंबे समय से लंबित इस मांग को उन्होंने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया और शासन स्तर पर प्रयासों के बाद तालाब निर्माण की स्वीकृति मिली। लेकिन अब जब परियोजना का भूमिपूजन हुआ, तो भाजपा ने भी स्वीकृति का श्रेय सांसद के प्रयासों को दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विधानसभा में उठी मांग और मंत्री के आश्वासन के बाद स्वीकृति तक पहुंची इस परियोजना में विधायक की भूमिका को आखिर किस तरह देखा जाए?
पहले विधानसभा में उठी मांग, फिर स्वीकृति—अब श्रेय की चर्चा
विधायक कमलेश्वर डोडियार की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, रूपारेल तालाब निर्माण की मांग लंबे समय से लंबित थी। विधायक ने विधानसभा सत्र के दौरान जल संसाधन विभाग से इस परियोजना को लेकर सवाल उठाया था। उनके पक्ष के अनुसार, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सदन में जवाब देते हुए आश्वासन दिया था। इसके बाद परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति मिली।
विधानसभा में हुई चर्चा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की जानकारी भी सामने आई है। यह वीडियो इस पूरे मामले का अहम पहलू माना जा रहा है, क्योंकि इसमें दर्ज बातचीत से विधायक द्वारा सदन में उठाए गए मुद्दे और मंत्री के जवाब को समझने में मदद मिल सकती है।
विधायक पक्ष का कहना है कि क्षेत्र की सिंचाई समस्याओं को विधानसभा में उठाना और शासन का ध्यान आकर्षित करना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। रूपारेल तालाब की मांग को लेकर किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए विधायक पक्ष ने इसे क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
भूमिपूजन के बाद भाजपा भी मैदान में, सांसद के प्रयासों का दावा
तालाब की स्वीकृति के बाद आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भाजपा सांसद प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि यह जल संसाधन विभाग का शासकीय कार्यक्रम था और तालाब की स्वीकृति सांसद महोदया के विशेष प्रयासों से मिली है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्रीमती संगीता चारेल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष क्रांति जोशी, जनपद अध्यक्ष कैलाशचंद्र मुनिया, सैलाना जनपद अध्यक्ष श्रीमती कैलाशी बाई चारेल, सांसद प्रतिनिधि संजय टांक, मंडी सांसद प्रतिनिधि सतीश नाहर, विभिन्न मंडलों के पदाधिकारी, सरपंच विजय हारी और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भाजपा की ओर से तालाब को किसान हितैषी परियोजना बताते हुए कहा गया कि इसके निर्माण से किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी और क्षेत्र में कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, विधायक पक्ष की ओर से विधानसभा में उठाए गए मुद्दे और मंत्री के आश्वासन का हवाला दिए जाने के बाद अब परियोजना की स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो गया है। स्वीकृति आदेश, विभागीय प्रस्ताव और विधानसभा की कार्यवाही से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि परियोजना को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में विभिन्न जनप्रतिनिधियों के प्रयासों की क्या भूमिका रही।
विधायक भोपाल में, प्रतिनिधियों ने किया भूमिपूजन
विधायक कमलेश्वर डोडियार के भोपाल में रहने के कारण उनकी ओर से क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य शरद डोडियार और विधायक प्रतिनिधि पूनम डामोर ने भूमिपूजन किया।
विधायक पक्ष का कहना है कि रूपारेल तालाब केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग से जुड़ी परियोजना है। पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को खेती में मदद मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
इस घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि विधायक की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधियों ने भूमिपूजन किया, जबकि भाजपा नेताओं ने भी अलग से कार्यक्रम में अपनी भागीदारी और भूमिका को सामने रखा। इससे परियोजना को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अधिक चर्चा में आ गई है।
डोडियार ने दूसरे लंबित तालाबों का मुद्दा भी उठाया
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने विधानसभा में केवल रूपारेल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की अन्य सिंचाई परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया।
उनके अनुसार, बाजना जनपद की मांदलिया घाट तालाब और रावटी नाला परियोजनाएं वन विभाग की अनापत्ति एवं स्वीकृति के अभाव में लंबित हैं। इन परियोजनाओं को जल्द मंजूरी दिलाकर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की गई।
इसके अलावा क्षेत्र की लगभग सात लघु सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की मांग भी रखी गई। बेरड़ी, बरड़ापाड़ा, देवका, कुंडल, सेमलखेड़ी, रूपापड़ा, देवलिया, कोटड़ा तंबोलिया, बोरखेड़ा, भिंटी, घूंघट्याखेड़ा और मरगुल सहित आदिवासी बहुल गांवों में नए तालाब, बैराज और जल संरक्षण परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए मांग पत्र एवं प्रस्ताव दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
विधायक का तर्क है कि सैलाना विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने से किसानों को खेती के लिए पानी मिलेगा। इससे कृषि आधारित आजीविका मजबूत होगी और रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
मंत्री ने बताए जिले की सिंचाई परियोजनाओं के आंकड़े
विधानसभा में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के जवाब के अनुसार, रतलाम जिले में एक मध्यम और 123 लघु सहित कुल 124 सिंचाई परियोजनाएं निर्मित हैं। इनसे 36,263 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलने की जानकारी दी गई।
मंत्री के अनुसार, जिले में चार लघु परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि एक मध्यम और 17 लघु सहित कुल 18 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा परीक्षण के बाद 15 नई लघु परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने की बात कही गई।
ये आंकड़े बताते हैं कि जिले में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कितना महत्वपूर्ण है। ऐसे में रूपारेल तालाब जैसी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना किसानों के हित में आवश्यक है।
राजनीतिक श्रेय से बड़ा सवाल—किसानों को कब मिलेगा पानी?
रूपारेल तालाब की स्वीकृति और भूमिपूजन को लेकर भाजपा तथा विधायक पक्ष के अलग-अलग दावे सामने हैं। विधायक पक्ष विधानसभा में उठाई गई मांग और मंत्री के आश्वासन को अपनी भूमिका का आधार बता रहा है, जबकि भाजपा सांसद के प्रयासों को श्रेय दे रही है।
इस पूरे मामले में विधानसभा का वायरल वीडियो और परियोजना से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इनके आधार पर स्वीकृति की प्रक्रिया और विभिन्न जनप्रतिनिधियों के योगदान की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
फिलहाल, रूपारेल तालाब को लेकर राजनीतिक श्रेय की चर्चा तेज है, लेकिन क्षेत्र के किसानों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि ₹3.59 करोड़ की परियोजना का निर्माण समय पर पूरा हो और खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचे। विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा उठाई गई अन्य लंबित परियोजनाओं पर भी शासन शीघ्र निर्णय ले, ताकि सैलाना के आदिवासी अंचल में जल संकट और पलायन की समस्या से राहत मिल सके।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत