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  • धर्म : मालवा अंचल के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है मां चामुंडा धाम, गजनी खेड़ी (चामुंडा माता ग्राम)

    JAGDISH CHANDRA MALVIYA   - आगर मालवा
    धर्म
    धर्म   - आगर मालवा[18-10-2026]
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  • जनआस्था, इतिहास और पुरातात्विक महत्व का अद्भुत संगम है मां चामुंडा धाम




    उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील मुख्यालय से लगभग 12 कि.मी. दूर स्थित गजनीखेड़ी ग्राम का नाम अब शासन द्वारा जनभावना के अनुरूप चामुंडा माता ग्राम किया गया है। ग्राम पंचायत गजनीखेड़ी का नाम परिवर्तन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा  5 जनवरी 2025 को किया गया। यहाँ स्थित मां चामुंडा माता मंदिर मालवा ही नहीं, निमाड़ और इंदौर अंचल के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है।

    इतिहास एवं पुरातात्विक महत्व 
     मंदिर का निर्माण छठी-सातवीं शताब्दी में गुप्त शासकों द्वारा कराया गया माना जाता है। यह भूमिज शैली का उत्कृष्ट एवं पूर्वाभिमुखी मंदिर है। मंदिर की विशेषता है कि यह बिना नींव के टिका हुआ है, जो प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है। मंदिर में वर्षों से अखण्ड ज्योत प्रज्ज्वलित है
    गर्भगृह में प्रमुख मूर्ति चंड-मुंड का संहार करने वाली मां चामुंडा की है। बाजू में स्कंद माता व प्रति स्कंद माता की मूर्तियाँ तथा दूसरी ओर दुर्लभ शेषशायी गणेश जी की मूर्ति है। प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के अनुसार यह शेषशायी गणेश प्रतिमा विश्व में अत्यंत दुर्लभ है, इस प्रकार की दूसरी प्रतिमा केवल काठमांडू (नेपाल) में है। मंदिर में सप्तमातृका के रूप में देवी विद्यमान थीं। परमार काल में इसका जीर्णोद्धार हुआ। 13वीं सदी में औदिच्य ब्राह्मणों तथा पलवा राजघराने द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया, जिसका शिलालेख मंदिर की दीवार पर अंकित है। मंडप के दाहिनी ओर बाह्य भित्ति पर 11वीं सदी का नागरी लिपि में पाँच पंक्तियों का शिलालेख उत्कीर्ण है। मंदिर आंगन में दो प्राचीन छतरियां एवं एक कुंड स्थित है
     डॉ. वाकणकर ने वर्ष 1981 में गजनीखेड़ी एवं रूनीजा के टीलों पर दो वर्षों तक उत्खनन कराया, जिसमें परमारकालीन अवशेष, मृद्भाण्ड, धातु के सिक्के एवं मुद्राएं प्राप्त हुई थीं। वर्तमान में यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित है। 

    जनश्रुति, मान्यता एवं पौराणिक महत्व 
    स्थानीय जनश्रुति के अनुसार यहां माता की प्रतिमा दिन में तीन स्वरूप धारण करती है। प्रातः बाल्यावस्था, मध्याह्न में युवावस्था एवं सायं में प्रौढ़ावस्था के रूप में दर्शन देती है। इसे चमत्कारिक एवं जागृत स्वरूप माना जाता है। चंड-मुंड वध की कथा से इसका संबंध जोड़ा जाता है।

     जनआस्था, पूजा पद्धति एवं परंपरा 
     यह मंदिर निमाड़ सहित इंदौर क्षेत्र के अरझरे एवं लाड़ परिवार के सैकड़ों परिवारों की कुलदेवी का स्थान है।
    - पूजा पद्धति शैव-शाक्त परंपरा के अनुरूप है। नाथ संप्रदाय के पुजारी श्री ईश्वरगिरी गोस्वामी परंपरा से सेवा-पूजा करते आ रहे हैं। प्रतिदिन प्रातः-सायं आरती, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं अखण्ड ज्योत का विशेष विधान है। मनोकामना पूर्ति हेतु भक्त पान, चुनरी एवं नारियल अर्पित करते हैं। निःसंतान दंपतियों एवं नवविवाहितों द्वारा संतान प्राप्ति एवं सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी जाती है। 

     मेले, उत्सव एवं विशेष आयोजन 
    सावन में हरियाली अमावस्या के दूसरे दिन मंदिर प्रांगण में एक दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जबकि ग्राम में आधे दिन का मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं।
    शारदीय एवं चैत्र नवरात्र
     प्रमुख उत्सव है। नवरात्र में प्रातः-सायं हजारों भक्त आरती में शामिल होते हैं। निमाड़ क्षेत्र से हजारों यात्री तीन दिन तक रुककर पूजन-अर्चन करते हैं।
    महाअष्टमी पर भक्तों के सहयोग से 2100 से अधिक कन्याओं का पूजन एवं भण्डारा आयोजित किया जाता है। 

    श्रद्धालुओं की संख्या 
    सामान्य दिनों में प्रतिदिन 500 से 1000 तथा नवरात्र, अमावस्या एवं मेले के अवसर पर 10 हजार से 25 हजार तक श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं। सिंहस्थ एवं मुख्यमंत्री के आगमन के पश्चात पर्यटन एवं धार्मिक महत्व में और वृद्धि हुई है। अब यह श्री चामुंडा धाम जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित हो रहा है और मालवा अंचल के ग्रामीणों श्रद्धालुओं और  माता भक्तों की जन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया है नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं का सैलाब सैलाब उमड़ रहा है

    जैसा कि श्री श्याम पुरोहित रुणीजा वाले एवं मंदिर परिसर में माता भक्तों ने बताया। 

    आलेख_जगदीश चंद्र मालवीय
    आगर मालवा







  • धर्म : मालवा अंचल के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है मां चामुंडा धाम, गजनी खेड़ी (चामुंडा माता ग्राम)

    JAGDISH CHANDRA MALVIYA   - आगर मालवा
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    धर्म   - आगर मालवा[18-10-2026]
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    जनआस्था, इतिहास और पुरातात्विक महत्व का अद्भुत संगम है मां चामुंडा धाम




    उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील मुख्यालय से लगभग 12 कि.मी. दूर स्थित गजनीखेड़ी ग्राम का नाम अब शासन द्वारा जनभावना के अनुरूप चामुंडा माता ग्राम किया गया है। ग्राम पंचायत गजनीखेड़ी का नाम परिवर्तन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा  5 जनवरी 2025 को किया गया। यहाँ स्थित मां चामुंडा माता मंदिर मालवा ही नहीं, निमाड़ और इंदौर अंचल के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है।

    इतिहास एवं पुरातात्विक महत्व 
     मंदिर का निर्माण छठी-सातवीं शताब्दी में गुप्त शासकों द्वारा कराया गया माना जाता है। यह भूमिज शैली का उत्कृष्ट एवं पूर्वाभिमुखी मंदिर है। मंदिर की विशेषता है कि यह बिना नींव के टिका हुआ है, जो प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है। मंदिर में वर्षों से अखण्ड ज्योत प्रज्ज्वलित है
    गर्भगृह में प्रमुख मूर्ति चंड-मुंड का संहार करने वाली मां चामुंडा की है। बाजू में स्कंद माता व प्रति स्कंद माता की मूर्तियाँ तथा दूसरी ओर दुर्लभ शेषशायी गणेश जी की मूर्ति है। प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के अनुसार यह शेषशायी गणेश प्रतिमा विश्व में अत्यंत दुर्लभ है, इस प्रकार की दूसरी प्रतिमा केवल काठमांडू (नेपाल) में है। मंदिर में सप्तमातृका के रूप में देवी विद्यमान थीं। परमार काल में इसका जीर्णोद्धार हुआ। 13वीं सदी में औदिच्य ब्राह्मणों तथा पलवा राजघराने द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया, जिसका शिलालेख मंदिर की दीवार पर अंकित है। मंडप के दाहिनी ओर बाह्य भित्ति पर 11वीं सदी का नागरी लिपि में पाँच पंक्तियों का शिलालेख उत्कीर्ण है। मंदिर आंगन में दो प्राचीन छतरियां एवं एक कुंड स्थित है
     डॉ. वाकणकर ने वर्ष 1981 में गजनीखेड़ी एवं रूनीजा के टीलों पर दो वर्षों तक उत्खनन कराया, जिसमें परमारकालीन अवशेष, मृद्भाण्ड, धातु के सिक्के एवं मुद्राएं प्राप्त हुई थीं। वर्तमान में यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित है। 

    जनश्रुति, मान्यता एवं पौराणिक महत्व 
    स्थानीय जनश्रुति के अनुसार यहां माता की प्रतिमा दिन में तीन स्वरूप धारण करती है। प्रातः बाल्यावस्था, मध्याह्न में युवावस्था एवं सायं में प्रौढ़ावस्था के रूप में दर्शन देती है। इसे चमत्कारिक एवं जागृत स्वरूप माना जाता है। चंड-मुंड वध की कथा से इसका संबंध जोड़ा जाता है।

     जनआस्था, पूजा पद्धति एवं परंपरा 
     यह मंदिर निमाड़ सहित इंदौर क्षेत्र के अरझरे एवं लाड़ परिवार के सैकड़ों परिवारों की कुलदेवी का स्थान है।
    - पूजा पद्धति शैव-शाक्त परंपरा के अनुरूप है। नाथ संप्रदाय के पुजारी श्री ईश्वरगिरी गोस्वामी परंपरा से सेवा-पूजा करते आ रहे हैं। प्रतिदिन प्रातः-सायं आरती, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं अखण्ड ज्योत का विशेष विधान है। मनोकामना पूर्ति हेतु भक्त पान, चुनरी एवं नारियल अर्पित करते हैं। निःसंतान दंपतियों एवं नवविवाहितों द्वारा संतान प्राप्ति एवं सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी जाती है। 

     मेले, उत्सव एवं विशेष आयोजन 
    सावन में हरियाली अमावस्या के दूसरे दिन मंदिर प्रांगण में एक दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जबकि ग्राम में आधे दिन का मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं।
    शारदीय एवं चैत्र नवरात्र
     प्रमुख उत्सव है। नवरात्र में प्रातः-सायं हजारों भक्त आरती में शामिल होते हैं। निमाड़ क्षेत्र से हजारों यात्री तीन दिन तक रुककर पूजन-अर्चन करते हैं।
    महाअष्टमी पर भक्तों के सहयोग से 2100 से अधिक कन्याओं का पूजन एवं भण्डारा आयोजित किया जाता है। 

    श्रद्धालुओं की संख्या 
    सामान्य दिनों में प्रतिदिन 500 से 1000 तथा नवरात्र, अमावस्या एवं मेले के अवसर पर 10 हजार से 25 हजार तक श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं। सिंहस्थ एवं मुख्यमंत्री के आगमन के पश्चात पर्यटन एवं धार्मिक महत्व में और वृद्धि हुई है। अब यह श्री चामुंडा धाम जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित हो रहा है और मालवा अंचल के ग्रामीणों श्रद्धालुओं और  माता भक्तों की जन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया है नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं का सैलाब सैलाब उमड़ रहा है

    जैसा कि श्री श्याम पुरोहित रुणीजा वाले एवं मंदिर परिसर में माता भक्तों ने बताया। 

    आलेख_जगदीश चंद्र मालवीय
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  • धर्म: आस्था, इतिहास और परम्परा का संगम जहां मां कालिका स्वयं रात्रि में अपना श्रृंगार करती, ऐसी जनश्रुति

    धर्म:
    धर्म   - आगर मालवा[18-10-2026]
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  • धर्म: आस्था, इतिहास और परम्परा का संगम जहां मां कालिका स्वयं रात्रि में अपना श्रृंगार करती, ऐसी जनश्रुति

    आस्था, इतिहास और परम्परा का संगम जहां मां कालिका स्वयं रात्रि में अपना श्रृंगार करती, ऐसी जनश्रुति
    धर्म   - आगर मालवा[18-10-2026]
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  • श्री महामाया भादवामाता मंदिर में 19 अक्टूबर को रात्रि 10: 30 बजे से होगा महाअष्टमी का मुख्य हवन

    श्री महामाया भादवामाता मंदिर में 19 अक्टूबर को रात्रि 10:
    धर्म   - नीमच[17-10-2026]
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  • श्री महामाया भादवामाता मंदिर में 19 अक्टूबर को रात्रि 10: 30 बजे से होगा महाअष्टमी का मुख्य हवन

    30 बजे से होगा महाअष्टमी का मुख्य हवन
    धर्म   - नीमच[17-10-2026]
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  • धर्म: इन दिनों पूरा अंचल शक्ति की भक्ति में डूबा हुआ है, कोई गरबा नृत्य तो कोई निराहार तो कोई चप्पल- जुते छोड़कर मां को रिझाने में मशगूल हैं....आवरी माताजी मंदिर पर नवमी सोमवार को होगा हवन पूजन

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  • धर्म: इन दिनों पूरा अंचल शक्ति की भक्ति में डूबा हुआ है, कोई गरबा नृत्य तो कोई निराहार तो कोई चप्पल- जुते छोड़कर मां को रिझाने में मशगूल हैं....आवरी माताजी मंदिर पर नवमी सोमवार को होगा हवन पूजन

    इन दिनों पूरा अंचल शक्ति की भक्ति में डूबा हुआ है, कोई गरबा नृत्य तो कोई निराहार तो कोई चप्पल- जुते छोड़कर मां को रिझाने में मशगूल हैं....आवरी माताजी मंदिर पर नवमी सोमवार को होगा हवन पूजन
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  • धर्म: विश्व प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में शामिल है कानड़ का माँ हिंगलाज देवी मठ, तंत्र साधना और जनआस्था का अद्वितीय संगम

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    धर्म   - आगर मालवा[17-10-2026]
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  • धर्म: विश्व प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में शामिल है कानड़ का माँ हिंगलाज देवी मठ, तंत्र साधना और जनआस्था का अद्वितीय संगम

    विश्व प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में शामिल है कानड़ का माँ हिंगलाज देवी मठ, तंत्र साधना और जनआस्था का अद्वितीय संगम
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  • धर्म: छोटीसादड़ी के गोमाना से चीताखेडा के आवरी माता जी तक 8 घंटे में 15 किलोमीटर दूरी तय कर पहुंची 351फिट लंबी पैदल चुनरी यात्रा

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[15-10-2026]
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  • धर्म: छोटीसादड़ी के गोमाना से चीताखेडा के आवरी माता जी तक 8 घंटे में 15 किलोमीटर दूरी तय कर पहुंची 351फिट लंबी पैदल चुनरी यात्रा

    छोटीसादड़ी के गोमाना से चीताखेडा के आवरी माता जी तक 8 घंटे में 15 किलोमीटर दूरी तय कर पहुंची 351फिट लंबी पैदल चुनरी यात्रा
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  • धर्म: जनआस्था और विश्वास की अनूठी झलक देखने को मिलती है श्री बाड़ी माता मंदिर, पचेटी मे....पचेटी के बाडी माता मंदिर में हर एक शुभ कार्य से पूर्व पट्टा लेने की है परंपरा

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    धर्म   - आगर मालवा[15-10-2026]
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    जनआस्था और विश्वास की अनूठी झलक देखने को मिलती है श्री बाड़ी माता मंदिर, पचेटी मे....पचेटी के बाडी माता मंदिर में हर एक शुभ कार्य से पूर्व पट्टा लेने की है परंपरा
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  • धर्म: 600 साल पुराने श्री लालमाता मंदिर से जुड़ी हैं, जनआस्‍था और विश्‍वास की अनेकों कहानियाँ....तनोड़िया के पास है मंदिर, नवरात्रि में भक्तों का लगता है तांता... !

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    धर्म   - आगर मालवा[14-10-2026]
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  • धर्म: 600 साल पुराने श्री लालमाता मंदिर से जुड़ी हैं, जनआस्‍था और विश्‍वास की अनेकों कहानियाँ....तनोड़िया के पास है मंदिर, नवरात्रि में भक्तों का लगता है तांता... !

    600 साल पुराने श्री लालमाता मंदिर से जुड़ी हैं, जनआस्‍था और विश्‍वास की अनेकों कहानियाँ....तनोड़िया के पास है मंदिर, नवरात्रि में भक्तों का लगता है तांता... !
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  • धर्म: बीजा नगरी में प्राचीनकाल से प्रज्वलित है आस्था की अखंड ज्योत - श्री हरसिद्धि माता मंदिर

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    धर्म   - आगर मालवा[13-10-2026]
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  • धर्म: आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा

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    धर्म   - आगर मालवा[12-10-2026]
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  • धर्म: आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा

    आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा
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  • शारदीय नवरात्रि विशेष : माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा

    शारदीय नवरात्रि विशेष :
    धर्म   - आगर मालवा[09-10-2026]
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  • शारदीय नवरात्रि विशेष : माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा

       माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा
    धर्म   - आगर मालवा[09-10-2026]
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  • धर्म: व्हीलचेयर पर आते हैं लकवा पीड़ित, मां भादवा की कृपा से पैदल लौटने की आस्था.....धर्म, आस्था और विश्वास की त्रिवेणी है महामाया मां भादवा माता धाम

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[08-10-2026]
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  • धर्म: व्हीलचेयर पर आते हैं लकवा पीड़ित, मां भादवा की कृपा से पैदल लौटने की आस्था.....धर्म, आस्था और विश्वास की त्रिवेणी है महामाया मां भादवा माता धाम

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  • आगर : चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण

    आगर :
    धर्म   - आगर मालवा[04-10-2026]
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  • आगर : चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण

     चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण
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  • धर्म: 10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[25-09-2026]
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  • धर्म: 10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम

    10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम
    धर्म   - नीमच[25-09-2026]
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  • धर्म: लोकदेवता भगवान वीर तेजाजी के जन्मोत्सव पर भड़क सनावदा गांव में उमड़ी भक्ति.....सुख समृद्धि की प्रार्थना की

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[20-09-2026]
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    लोकदेवता भगवान वीर तेजाजी के जन्मोत्सव पर भड़क सनावदा गांव में उमड़ी भक्ति.....सुख समृद्धि की प्रार्थना की
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  • धर्म: हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष

    धर्म:
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  • धर्म: हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष

    हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष
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