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आगर-मालवा - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार 26 अक्टूबर 2026 को विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा में प्रस्तावित माँ बगलामुखी देवी लोक के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा माँ बगलामुखी देवी लोक का भव्य निर्माण कार्य करवाया जा रहा है, जिसके प्रथम चरण के तहत लगभग 85.40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर जो कि तीन मुखों वाली त्रिशक्ति बगलामुखी देवी को समर्पित है, लखुंदर नदी के किनारे नलखेड़ा, जिला आगर-मालवा में स्थित है। मान्यता है कि द्वापर युग से चला आ रहा यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है तथा इसकी स्थापना महाभारत में विजय के उद्देश्य से भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने की थी। यहाँ की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। प्राचीन तंत्र ग्रंथों में उल्लेखित दस महाविद्याओं में से एक माँ बगलामुखी हैं, इसलिए इस मंदिर का अतिविशिष्ट महत्व है। यहाँ देश-विदेश के शैव एवं शाक्त मार्गी साधु-संत तथा श्रद्धालुगण हवन-अनुष्ठान के लिए आते हैं तथा चारों नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्वीकृत देवी लोक का निर्माण लगभग 20 हेक्टेयर भूमि पर वृहद स्तर पर भव्यता एवं वास्तुशास्त्र के अनुसार किया जा रहा है। प्रारंभिक प्राक्कलन अनुसार प्रथम चरण की कुल लागत 85.40 करोड़ रुपये है, जिसे लगभग 85.40 करोड़ के रूप में स्वीकृत किया गया है। प्रथम चरण में मुख्य मंदिर गर्भगृह एवं सुपर स्ट्रक्चर, मुख्य मंदिर कॉरिडोर के प्रवेश एवं निकास द्वार, प्रसाद शॉप जोन के साथ शू स्टैंड, हैंड वॉश एवं मोबाइल डिपॉजिट जोन, पब्लिक अमेनिटीज के तहत टॉयलेट ब्लॉक एवं पार्किंग टॉयलेट ब्लॉक, घाट डेवलपमेंट, विशाल यज्ञ शाला, ड्राइव-वे/रोड निर्माण, साइट लेवलिंग, फिलिंग एवं कम्पैक्शन, विभिन्न प्रकार की बाउंड्री वॉल, प्रोटोकॉल बिल्डिंग, विद्यमान शिव मंदिर क्रमांक 1 एवं 2 का जीर्णोद्धार तथा 18 मीटर, 12 मीटर एवं 9 मीटर चौड़े भव्य प्रवेश द्वारों का निर्माण कार्य किया जाना प्रस्तावित है। इस भव्य निर्माण कार्य में मंदिर कॉरिडोर के भव्य प्रवेश द्वार, विशाल यज्ञ शाला, वाहनों हेतु पार्किंग व्यवस्था, सुंदर घाट निर्माण, प्रसाद काउंटर, पब्लिक सुविधाघर एवं सड़क निर्माण जैसे प्रमुख कार्य सम्मिलित हैं। देवी लोक के निर्माण से नलखेड़ा में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी तथा श्रद्धालुओं को सर्वसुविधायुक्त दर्शन व्यवस्था प्राप्त हो सकेगी। |