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किसान कल्याण वर्ष 2026 खेती किसानों के लिए मंदिर समान, इस विद्यालय में सीखते रहने की जरूरत : केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री चौधरी *जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें किसान, पर्यावरण संरक्षण में दें योगदान* मंदसौर : किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत सिपानी कृषि अनुसंधान केंद्र में स्थापना दिवस एवं किसान सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री चौधरी ने सिपानी कृषि अनुसंधान केंद्र का अवलोकन किया। यहां कृषि वैज्ञानिकों द्वारा उन्हें गेहूं की विभिन्न प्रजातियों, उनके बीज, दाना, सिंचाई पद्धति तथा उत्पादन क्षमता के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने खेतों का निरीक्षण कर गेहूं की अलग-अलग किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने सिपानी कृषि अनुसंधान केंद्र में बीज परीक्षण प्रयोगशाला एवं किसान सभागार का शुभारंभ किया तथा बीज प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम में श्री राजेश गुर्जर द्वारा 570 वैरायटी के बीजों के परीक्षण पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। केंद्रीय मंत्री श्री चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि सिपानी कृषि अनुसंधान केंद्र एक अद्भुत शोध संस्थान है, जहां किसानों के हित में निरंतर अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि भारत की रीढ़ है और 146 करोड़ देशवासियों का पेट किसान ही भरता है। किसान कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, यह उसकी महानता है। उन्होंने किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा के लिए यह आवश्यक है। मौसम में हो रहे बदलाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती हैं, ऐसे में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। श्री चौधरी ने कहा कि खेती किसानों के लिए मंदिर के समान है और इस विद्यालय में लगातार सीखने की आवश्यकता है। सिपानी अनुसंधान केंद्र के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस केंद्र को हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने किसानों से मिट्टी परीक्षण करवाने और सॉइल हेल्थ कार्ड का लाभ लेने की भी अपील की। कार्यक्रम में सांसद श्री सुधीर गुप्ता ने कहा कि सिपानी कृषि अनुसंधान केंद्र ने शोध कार्यों को बढ़ावा देकर किसानों को लाभ पहुंचाया है। शोध कार्यों का परिणाम वर्षों बाद मिलता है, लेकिन इससे कृषि क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के बाद भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है और अब गुणवत्ता युक्त उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। सरकार दलहन एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए भी मिशन मोड में कार्य कर रही है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, डिप्टी कमिश्नर नारकोटिक्स श्री निखिल गांधी, वैज्ञानिक श्री अक्षय तालुकदार, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल, श्री नरेंद्र सिपानी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं पत्रकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री बृजेश जोशी द्वारा किया गया। |