रतलाम / सैलाना
रतलाम (मध्य प्रदेश) – आम आदमी की जमीन से जुड़े काम में भी भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताजा उदाहरण सामने आया है। लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने 16 अप्रैल 2026 को सैलाना तहसील में तैनात पटवारी कैलाश वडख्या को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा।
पूरा घटनाक्रम – कैसे फंस गया पटवारी?
ग्राम अडवानिया के रहने वाले जितेंद्र पाटीदार ने लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके पिता ईश्वरलाल पाटीदार के नाम पर लगभग 5 हेक्टेयर कृषि भूमि है। सीमांकन (boundary demarcation) का काम कराने के लिए जब उन्होंने पटवारी कैलाश वडख्या से संपर्क किया, तो पटवारी ने काम के बदले 30 हजार रुपये रिश्वत की भारी मांग रख दी।
पटवारी पहले ही 3 हजार रुपये हड़प चुका था। बाकी रकम पर सौदा हुआ – 7 हजार रुपये कम करके कुल 20 हजार रुपये में तय हो गया।
लेकिन जितेंद्र पाटीदार चुप नहीं बैठे। उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त उज्जैन में शिकायत कर दी। लोकायुक्त टीम ने पूरी प्लानिंग के साथ 16 अप्रैल को सैलाना तहसील के नायब नाजिर कक्ष में ट्रैप बिछाया।
और फिर...
जैसे ही पटवारी कैलाश वडख्या ने 20 हजार रुपये की रिश्वत की गड्डी हाथ लगाई, लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
लोकायुक्त की टीम ने दिखाया कमाल
यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश और पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन आनंद कुमार यादव के मार्गदर्शन में की गई।
ट्रैप टीम में शामिल:
निरीक्षक राजेंद्र वर्मा
प्रधान आरक्षक हितेश ललावत
आरक्षक विशाल रेशमिया
उमेश
श्याम शर्मा
क्या कहते हैं लोग?
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि मध्य प्रदेश में पटवारियों द्वारा रिश्वतखोरी आम बात बन गई है। आम किसान और भूमि मालिक सीमांकन, नामांतरण जैसे बुनियादी कामों के लिए भी भारी रिश्वत देने को मजबूर हैं। लोकायुक्त की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का संदेश देती है, लेकिन सवाल यह है – ऐसे कितने पटवारी अभी भी खुले घूम रहे हैं?
क्राइम रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत