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कोलकाता/पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 294 सीटों पर हो रहे इस चुनाव में सियासी मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है, जहां हर चरण के साथ राजनीतिक तापमान और बढ़ता नजर आ रहा है। पहले चरण के मतदान में रिकॉर्ड उत्साह देखने को मिला और कई क्षेत्रों में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। इतनी भारी भागीदारी को लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास का मजबूत संकेत माना जा रहा है। इस चुनाव में मुख्य टक्कर ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मानी जा रही है। दोनों ही दल पूरे दमखम के साथ मैदान में हैं और सत्ता हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, चुनावी माहौल पूरी तरह शांत नहीं रहा। कई इलाकों से हिंसा और झड़पों की खबरें सामने आई हैं, जिसके चलते भारतीय चुनाव आयोग को सख्त कदम उठाने पड़े। निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए कई पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई और संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर भी विवाद गहराया। विपक्ष ने लाखों नाम हटाने का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने इसे सूची शुद्धिकरण की प्रक्रिया बताया। इस मुद्दे ने चुनावी बहस को और तीखा बना दिया है। अगर मुद्दों की बात करें तो इस बार चुनाव में विकास, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, पानी और शहरी ढांचा प्रमुख चुनावी एजेंडा बने हुए हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनता इन मुद्दों पर खुलकर अपनी राय दे रही है। चुनावी सभाओं में नेताओं के तीखे बयान भी लगातार सुर्खियों में हैं, जिससे सियासी माहौल और ज्यादा गरमाता जा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच हर पार्टी खुद को जनता का असली हितैषी साबित करने में जुटी है। अब नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब मतगणना के बाद साफ हो जाएगा कि सत्ता की इस सबसे बड़ी जंग में जीत किसके हाथ लगती है। कुल मिलाकर, बंगाल चुनाव 2026 सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मोड़ बन चुका है। |