रतलाम / बाजना
अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर पर बाजना ब्लॉक के ग्राम हालीवाड़ा भागोरा में वाग्धारा, कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के नेतृत्व में एक प्रेरणादायी एवं जागरूकता से भरपूर सामुदायिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “आदिवासी पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति संरक्षण पर संवाद” रहा, जिसमें आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा गया।
कार्यक्रम की शुरुआत एक भव्य जागरूकता रैली से हुई, जिसमें सक्षम समूह, बाल स्वराज समूह, ग्राम स्वराज समूह, समुदाय सदस्य, महिलाएं, युवा एवं जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली के माध्यम से ग्रामीणों ने जल, जंगल, जमीन, बीज और जीवों के संरक्षण का संदेश देते हुए पर्यावरण बचाने का आह्वान किया। पूरे गांव में गूंजते जागरूकता नारों ने लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान जैव-विविधता, देशी बीज, पारंपरिक खेती एवं वन संरक्षण पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसे ग्रामीणों ने बड़े ध्यान और उत्साह से देखा। संवाद सत्र में ग्रामीण महिलाओं एवं समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आदिवासी समाज वर्षों से जंगलों, जल स्रोतों, औषधीय पौधों तथा देशी बीजों का संरक्षण करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना ही आदिवासी संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
वाग्धारा की ब्लॉक सहजकर्ता रेनुका पोरवाल ने जैव-विविधता संरक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने का विषय नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्थानीय पारंपरिक ज्ञान, देशी बीज संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय जैव-विविधता प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें देशी बीज, स्थानीय फल, औषधीय पौधे एवं पारंपरिक खाद्य सामग्री प्रदर्शित की गई। बच्चों और युवाओं ने लोकगीतों, नारों और संदेशों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का महत्व प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की विशेष गतिविधि “हलमा” रही, जिसमें ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जल स्रोतों, जंगलों और सामुदायिक भूमि संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर KAAS कोऑर्डिनेटर मोहन भूरिया तथा फील्ड सहजकर्ता बलराम चारपोटा की विशेष सहभागिता रही, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के अंत में सभी समुदाय सदस्यों ने जैव-विविधता संरक्षण की शपथ लेते हुए जल, जंगल, जमीन, बीज और जीवों की सुरक्षा के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि स्थानीय पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से ही वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है।