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भीषण गर्मी में भी उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, शिव मंदिर प्रांगण में भागवत कथा का भक्तिमय माहौल चीताखेड़ा । जन्म देने वाली माता सिर्फ 6 माह तक दूध पिलाती है, और गोमाता सालों तक दूध पिलाती है। गोमाता को निराश्रित पशु मान लेने या फिर माता का दर्जा देने की बातें सतही है, इनमें गोवंश का उद्धार होने वाला नहीं है। गोमाता को बचाना है तो हमें हमारी मानसिकता बदलनी होगी। गोमाता के नाम से राजनीतिक लोग राजनीति कर रहे हैं गोमाता की रक्षा नहीं। गोपालक गोमाता को सड़कों पर नहीं छोड़े। शास्त्रों का अनुसरण करने से जीवन संकटों से मुक्त होकर परमात्मा की भक्ति की ओर अग्रसर होता है। मोबाइल बच्चों के मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास को प्रभावित कर रहा है। शुरूआत में बच्चे इसे मनोरंजन समझकर जुड़ते हैं लेकिन धीरे-धीरे वे आर्थिक जाल में फंसने लगते हैं। बच्चों के हाथों में धर्मग्रंथों के बजाए हम मोबाइल थमा रहे हैं जो बहुत ग़लत है। व्यक्ति को चिंता छोड़कर प्रभु का चिंतन करना चाहिए तथा भक्ति के जागरण के लिए भगवान की कथा का नियमित श्रवण करना चाहिए। यह प्रेरणा दायक बात पंडित कुलदीप शर्मा बांगरेड वाले ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को कहीं। माली मौहल्ले में स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित संगीतमय भागवत कथा में उन्होंने कहा कि हरिद्वार की गंगा में डूबोगे तो मर जाओगे और श्रीमद् भागवत गंगा में डूबोगे तो तर जाओगे। जिसका चित्त परमात्मा की भक्ति से शांत हो चुका है, वही दूसरों की चिंताओं का समाधान कर सकता है। जो शांत हैं वही संत हैं और जो संत हैं वही वास्तव में शांत हैं।ऐसे संत के पास श्रद्धा और समर्पण भाव से जाने पर मन की व्याकुलता दूर होती है। सच्चे संत व्यक्ति से कुछ नहीं चाहते, बल्कि उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि संतों का कार्य चमत्कार या तमाशा दिखाना नहीं है। हमारे धर्म ग्रंथो में जीवन की प्रत्येक समस्या के लिए शास्त्र सम्मत उपाय बताए गए हैं और संत इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर लोगों को सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा के बिना संतों का सानिध्य प्राप्त नहीं होता है। संत परमात्मा के दूत के रूप में जीवन के संकटों का समाधान करते हुए भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का जागरण करते हैं। शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।बांगरेड के पंडित कुलदीप शर्मा के मुखारविंद से कथा का रसपान करने के लिए आस-पास सहित दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। भीषण गर्मी के बावजूद भक्तों की आस्था कम नहीं हो रही हैं और पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। कथा का रविवार को द्वितीय दिवस था दूसरे दिन ही श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या कथा स्थल पर पहुंची। पंडित द्वारा धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जागरूकता पर दिए जा रहे प्रवचनों से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कथा पंडाल में भक्ति भाव और धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में बांगरेड के पंडित कुलदीप शर्मा द्वारा पहली बार इतने भव्य स्तर पर कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई है। बाहर से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो ,इसके लिए पहले से ही सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई थी। आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान परिक्षित, मुनि सुखदेव, देव ऋषि नारद, भगवान शिव पार्वती, श्रमिक ऋषि और महाभारत का प्रसंग विस्तार से सुनाया गया। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे से शाम 3:30 तक कथावाचक पंडित कुलदीप शर्मा के मुखारविंद से प्रवाहित की जा रही है। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |