पॉलिसी बेचते समय बड़े-बड़े वादे क्लेम के समय हाथ खड़े — शिक्षक राजेश अवस्थी का आरोप
रतलाम / सैलाना। स्वास्थ्य बीमा को आम आदमी की मुश्किल घड़ी का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है, लेकिन यदि बीमारी के समय बीमा कंपनी ही हाथ खड़े कर दे तो उपभोक्ता के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। सैलाना में सामने आया एक मामला अब बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली और उपभोक्ता अधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सैलाना निवासी शिक्षक राजेश अवस्थी ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पत्नी के इलाज पर हजारों रुपये खर्च करने और सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें बीमा क्लेम की राशि नहीं दी गई। अब मामला उपभोक्ता अधिकारों और बीमा कंपनियों की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार शिक्षक राजेश अवस्थी ने परिवार की सुरक्षा के उद्देश्य से कंपनी की Family Health Optima Insurance Plan के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा कराया था। पॉलिसी क्रमांक 10411119006060538, यूनिक आईडी SHAHLIP25039V082425 तथा सर्टिफिकेट क्रमांक 7845111907038782 के तहत उनकी पत्नी प्रेमलता अवस्थी भी बीमित थीं। अवस्थी का कहना है कि उन्होंने नियमित रूप से प्रीमियम जमा किया और पॉलिसी पूरी तरह प्रभावी थी।उनका कहना है कि कंपनी द्वारा पॉलिसी लेते समय बीमारी की स्थिति में आर्थिक सहायता और त्वरित क्लेम भुगतान का भरोसा दिया गया था लेकिन जब वास्तव में परिवार पर स्वास्थ्य संकट आया तो कंपनी का रवैया पूरी तरह बदल गया।
अवस्थी के अनुसार फरवरी 2026 में उनकी पत्नी प्रेमलता अवस्थी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रारंभिक उपचार रतलाम के Ratlam Hospital & Research Centre में कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उन्हें गुजरात के अहमदाबाद स्थित Marengo CIMS Hospital में भर्ती कराना पड़ा। उपचार के दौरान परिवार पर करीब 50 हजार रुपये से अधिक का आर्थिक बोझ पड़ा।
शिक्षक का दावा है कि उपचार के दौरान और बाद में बीमा कंपनी की सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। अस्पतालों के बिल उपचार संबंधी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजात 17 फरवरी 2026 को कंपनी को जमा करा दिए गए थे। इसके बावजूद क्लेम राशि स्वीकृत नहीं की गई। अवस्थी का आरोप है कि कई बार संपर्क करने पर भी कंपनी की ओर से केवल टालमटोल की गई और संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
राजेश अवस्थी ने यह भी आरोप लगाया कि यह पहला अवसर नहीं है जब उन्हें निराशा हाथ लगी हो। इससे पहले पत्नी और पुत्री के उपचार के दौरान भी कंपनी द्वारा पूर्ण क्लेम राशि स्वीकृत नहीं की गई थी। उनका कहना है कि उस समय भी उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला लेकिन इस बार तो क्लेम को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
मामले को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ओम प्रकाश रजक के माध्यम से कंपनी के रतलाम इंदौर और चेन्नई स्थित मुख्यालय को विधिक नोटिस भेजा गया है। नोटिस में कंपनी से क्लेम निरस्त करने के कारणों की जानकारी मांगते हुए 7 दिवस के भीतर क्लेम राशि का भुगतान करने की मांग की गई है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कंपनी के विरुद्ध उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया जाएगा।
अवस्थी का कहना है कि वे केवल क्लेम राशि ही नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना आर्थिक क्षति ब्याज और मुकदमेबाजी में होने वाले खर्च की भी मांग करेंगे।
उनका आरोप है कि जब पॉलिसी बेची गई तब कंपनी ने सुरक्षा और सहयोग का भरोसा दिया लेकिन जरूरत के समय वही कंपनी अपने वादों से पीछे हट गई।
यह मामला अब केवल एक शिक्षक और एक बीमा कंपनी के बीच का विवाद नहीं रह गया है बल्कि उन हजारों बीमाधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है जो हर वर्ष नियमित रूप से प्रीमियम जमा करते हैं और कठिन समय में बीमा सुरक्षा पर भरोसा करते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देती है और पीड़ित उपभोक्ता को न्याय कब तक मिल पाता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत