रतलाम /सैलाना
सैलाना नगर में मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से निर्मित आरसीसी नाले के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रतलाम को विस्तृत पत्र लिखकर नाले के निर्माण में गंभीर गुणवत्ता संबंधी खामियों, घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और शासकीय राशि के संभावित दुरुपयोग की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
विधायक डोडियार ने अपने पत्र में बताया कि वर्ष 2022-23 में मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना (तृतीय चरण) के अंतर्गत नगर परिषद सैलाना द्वारा लगभग ₹40,46,028 की लागत से आरसीसी नाले का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद नाले की दीवारें और स्लैब क्षतिग्रस्त होकर टूटने लगे।
वर्तमान में नाले का बड़ा हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जिससे आसपास रहने वाले नागरिकों और राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
विधायक ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद मुकेश पटेल ने 5 सितंबर 2023 को इस मामले की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सैलाना से की थी। शिकायत के बाद 11 सितंबर 2023 को जांच दल गठित कर जांच के निर्देश भी जारी किए गए थे, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो दोषियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही क्षतिग्रस्त नाले का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया गया।
कमलेश्वर डोडियार ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण में लापरवाही या अनियमितता के दोषी अधिकारियों, अभियंताओं और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त नाले का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाए तथा यदि शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित दोषियों से राशि की वसूली भी की जाए। उन्होंने जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करने की भी मांग की है।
विधायक ने इस संबंध में क्षतिग्रस्त नाले के फोटोग्राफ भी पत्र के साथ संलग्न किए हैं तथा पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की है।
इस मामले के सामने आने के बाद सैलाना नगर में विकास कार्यों की गुणवत्ता और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत