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चीताखेड़ा । सावन माह के तीसरे सोमवार के अवसर पर चीताखेड़ा में भगवान श्री महाकाल की शाही सवारी निकली। डीजे व ढोल-ढमाको के साथ पूरे ठाठ-बाट से राजाधिराज भगवान श्री महाकाल गांव भ्रमण पर निकले। भक्तों के बीच पहुंचे भगवान के दर्शन पाकर भक्त भी धन्य हुए। भक्त जनों ने जगह-जगह फूल बरसाकर आत्मीय स्वागत सत्कार किया। आयोजक समिति के पदाधिकारी ने बताया कि महाकाल की शाही सवारी की सिर्फ पांच कांवड़िए से शुरुआत 2020 में हुई थी। धीरे- धीरे कांरवा बढ़ता गया और आज सैकड़ों कांवड़िए जुड़ गए। शाही सवारी में महाकाल का प्रतिरुप विराजित पालकी सहित डीजे साउण्ड एवं ढोल ढमाकों के साथ पालकी को भुजाओं पर उठाकर गांव भ्रमण करवाती भक्तों की टोली, जुबां पर हर-हर महादेव के जयकारे, ट्राली पर भगवान के स्वरूप में नृत्य करते कलाकार काल अघोरी डीजे साउण्ड पर थिरकती भक्तों की टोली, घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर भगवान के दर्शन के लिए प्रतिक्षारत भक्त सब कुछ इतना अद्भुत भव्य और सुंदर था कि सोमवार, शिव और सावन का अद्भुत संगम भक्तों के उत्साह में साफ-साफ नजर आ रहा था। कांवड़ यात्रा में शाही सवारी में शामिल महिलाएं पुरुषों युवक युवतियां भी नृत्य करते व जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। कांवड़ यात्रा में शाही सवारी निर्धारित मार्ग के जिस भी क्षेत्र में पहुंची वहां पूजा अर्चना और दर्शन के भक्तों की भीड़ उमड़ती रहीं। द्वार-द्वार पर महाकाल का स्वागत सत्कार भक्तों द्वारा किया गया। पालकी में शामिल भक्तजनों का अनेक सामाजिक संगठनों, समाजों और भक्तजनों ने स्वल्पाहार, पेयजल, ठंडाई वितरण कर स्वागत किया। अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गुजरी कांवड़ियों की कांवड़ यात्रा में झांकियों में भगवान का रुप धरकर कलाकारों ने बढ़ाया उत्साह - राजसी पालकी में ट्रेक्टर ट्राली में सवार कलाकार भगवान का रुप धरकर भजनों पर नृत्य करते हुए चल रहे थे । जल से भरी एक किलो से लेकर 1 क्विंटल 10 किलो वजन तक की कांवड़ लेकर रामझर महादेव मंदिर पहुंचे कांवड़िए हर साल की तरह इस बार भी बजरंग मंदिर से रामझर महादेव मंदिर तक 4 किलोमीटर दूर तक निकलने वाली विशाल पैदल कांवड़ यात्रा का सुबह 9 बजे चीताखेड़ा से निकली जो रामझर महादेव मंदिर 12:40 बजे पहुंचे। कांवड़ यात्रा में एक सौ 10 किलो वजन की कांवड़ लेकर भक्त कन्हैयालाल माली रामझर महादेव मंदिर पहुंचे । कांवड़ियों को करवाई स्वल्पाहार चीताखेड़ा गांव में बस स्टैंड से होकर रामझर महादेव मंदिर तक सड़क मार्ग से गुजरने वाले सभी कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को डॉक्टर जितेंद्र कुमार मित्र मंडल तथा डॉक्टर विक्रम परमार द्वारा स्वल्पाहार स्टाइल लगाई गई जहां सभी को स्वल्पाहार कराई गई। |