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एक की निजी कंपनी में महिला मजदूरों का हल्लाबोल....10 घंटे काम और सिर्फ ₹200 मजदूरी, अब नहीं सहेंगे सिंगोली : जिले के डिकेन क्षेत्र में गुरुवार की सुबह मजदूरी की सिसकियां आक्रोश के लावे में बदल गईं। एक निजी कंपनी के मुख्य द्वार पर उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब बरसों से चुपचाप शोषण सह रही सैकड़ों महिला मजदूरों का सब्र का बांध टूट गया। कम मजदूरी और अमानवीय तरीके से ज्यादा काम कराए जाने के विरोध में आक्रोशित महिलाओं ने कंपनी के मुख्य गेट को घेरकर जोरदार प्रदर्शन किया। पारंपरिक पहनावे और घूंघट की ओट में पहुंचीं इन ग्रामीण महिलाओं के तीखे तेवर देखकर कंपनी प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। इस पूरे हंगामे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। 200 की दिहाड़ी और 10 घंटे की गुलामी वायरल वीडियो में आंदोलन का नेतृत्व कर रही एक युवती ने कंपनी प्रबंधन के क्रूर चेहरों को बेनकाब करते हुए तीखे सवाल दागे हैं। युवती ने बेहद बेबाक अंदाज में कहा, "हमसे सुबह से शाम तक 10-10 घंटे हाड़-तोड़ काम कराया जाता है, लेकिन शाम को हमारी मेहनत की कीमत महज ₹200 थमा दी जाती है। क्या आज के जमाने में ₹200 में किसी परिवार का गुजारा संभव है? ऊपर से जबरन 10 टेबल काटने का मानसिक दबाव बनाया जाता है। अब यह अन्याय और शोषण हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। कलेक्टर रेट दो, वरना थप रहेगा चक्का अपनी अस्मिता और अधिकार की लड़ाई लड़ने उतरीं इन महिलाओं ने दोटूक शब्दों में प्रशासन और कंपनी को चेताया है कि जब तक उनकी तीन सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होंगी, वे काम पर नहीं लौटेंगी 400 रुपए की सम्मानजनक मजदूरी महिलाओं की साफ मांग है कि उन्हें वर्तमान नियमों और महंगाई के दौर को देखते हुए कम से कम ₹400 प्रतिदिन की कलेक्टर रेट दी जाए। 8 घंटे का ही कायदा देश के श्रम कानूनों का हवाला देते हुए महिलाओं ने कहा कि वे ईमानदारी से केवल 8 घंटे ही काम करेंगी, इससे ज्यादा काम का दबाव अवैध है। टारगेट के नाम पर प्रताड़ना बंद हो : क्षमता से अधिक काम का बोझ लादना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का खेल तुरंत बंद किया जाए। प्रबंधन मौन, प्रशासन की सुस्ती पर सवाल सुबह-सुबह हुए इस अप्रत्याशित घेराव और महिलाओं की सिंह गर्जना ने औद्योगिक क्षेत्र में खलबली मचा दी है। श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाली इस कंपनी के खिलाफ महिलाओं के इस साहसिक कदम की पूरे जिले में चर्चा है। फिलहाल मौके पर तनावपूर्ण शांति है। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया श्रम विभाग और स्थानीय प्रशासन इन लाचार बहनों को उनका हक दिला पाता है या पूंजीपतियों के दबाव में यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा रिपोर्ट : दिनेश जी जोशी |