रतलाम / सैलाना। शक्ति की आराधना और आस्था के महापर्व नवरात्रि के पावन अवसर पर संस्कार वैली विद्यालय, सैलाना द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सहभागिता करते हुए भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय के विद्यार्थियों को सैलाना स्थित प्रसिद्ध कालिका माता मंदिर ले जाया गया, जहां विधि-विधान और श्रद्धाभाव के साथ कन्या पूजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को नवरात्रि पर्व के धार्मिक महत्व तथा भारतीय परंपराओं में कन्या पूजन की विशेष मान्यता से परिचित होने का अवसर मिला। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच विद्यार्थियों ने माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कन्या पूजन के बाद गरबा रास में दिखा उत्साह
धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ गरबा रास में सहभागिता की। नवरात्रि के पारंपरिक रंगों और उत्सवी माहौल के बीच विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बना। गरबा रास के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों को प्रसादी वितरित की गई।
इस अवसर पर विद्यालय के को-डायरेक्टर श्री चंद्र प्रकाश प्रजापत, प्राचार्य श्रीमती संगीता दुबे सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार की सहभागिता से आयोजन श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ।
शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी जोर
संस्कार वैली विद्यालय की इस पहल ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करना भी है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और विरासत को समझने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं से आत्मीय रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
नवरात्रि के पावन पर्व पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक सहभागिता और संस्कारों की सीख का सुंदर संगम बना। विद्यालय की इस पहल ने शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत