बांसवाड़ा / घाटोल
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के घाटोल विधानसभा क्षेत्र में 14 अप्रैल को हुई अनिल निनामा की निर्मम हत्या ने पूरे आदिवासी समाज को आक्रोश से भर दिया है। भारत आदिवासी पार्टी से प्रत्याशी रहे अशोक निनामा भील के छोटे भाई अनिल निनामा की काली मगरी के पास देर रात अज्ञात हमलावरों द्वारा बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना उस समय हुई जब वे नोतरा कार्यक्रम से लौट रहे थे।
परिवार और स्थानीय समाज इसे सुनियोजित साजिश बता रहा है, जबकि पुलिस इसे प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रही है। यही विरोधाभास अब बड़े आंदोलन की वजह बन चुका है। परिजनों का साफ आरोप है—यह कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि सोची-समझी हत्या है।
इस जघन्य हत्याकांड के खिलाफ बांसवाड़ा जिला मुख्यालय पर लगातार आंदोलन चल रहा है। धरना-प्रदर्शन में न्याय की मांग जोर-शोर से उठ रही है — मुख्य आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी, कॉल डिटेल्स की जांच, परिवार की सुरक्षा और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांगों पर जोर दिया जा रहा है। 11 दिनों से अधिक समय से चला यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र में गूंज रहा है।
इसी आंदोलन के दौरान सैलाना (मध्य प्रदेश) के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने आदिवासी भाईचारे की भावना से जुड़ते हुए मजबूत पहल की।
जब आंदोलनकारियों के साथ थाना प्रभारी बांसवाड़ा के बीच तनाव बढ़ा और टीआई ने विधायक को “बच्चा” कहकर संबोधित किया, तो डोडियार का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तीखे शब्दों में थाना प्रभारी को हड़का दिया। विवाद के स्पष्टीकरण में डोडियार ने साफ कहा — “टीआई ने मुझे बच्चा बोला तो मैंने उसे तीखे शब्दों में हड़काया।
आंदोलन में अनावश्यक हस्तक्षेप के चलते मैंने उन्हें ‘राबड़िया’ तक कह दिया।” भीली बोली में ‘राबड़िया’ का मतलब होता है “बहुत ज्यादा गया-बीता” या अत्यधिक हद पार कर जाना।
यह शब्द स्थानीय आदिवासी समाज में गहरी अभिव्यक्ति रखता है और विधायक की नाराजगी को पूरी ताकत से दर्शाता है।
विधायक डोडियार ने केवल बयानबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अनिल निनामा के परिवार को न्याय की लड़ाई के लिए तत्काल 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग जुटाने के लिए पत्र लिखकर बड़े वकीलों को नियुक्त करने की पहल भी शुरू की है।
यह राशि चार राज्यों में चर्चा का विषय बन गई है। आदिवासी एकता और न्याय की भावना से ओत-प्रोत यह कदम दिखाता है कि सत्ता में बैठे नेता भी अपने समाज के दर्द को महसूस करते हैं और उसकी लड़ाई में कंधा लगाने को तैयार रहते हैं।
इसके अलावा, कमलेश्वर डोडियार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर अन्य लोगों से सहयोग मांगने का अनुरोध भी किया है। उनका मकसद है कि हाई कोर्ट के बड़े और अनुभवी वकीलों को हायर किया जाए ताकि मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।
विधायक डोडियार ने कहा की अनिल निनामा हत्याकांड अब एक सामान्य आपराधिक मामला नहीं रहा, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है। समाज का स्पष्ट संदेश है—अब अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा।
यह घटना आदिवासी इलाकों में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाती है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव या लापरवाही के कारण जांच सही दिशा में नहीं बढ़ रही।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि जांच को भटकाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, विधायक की सक्रियता ने प्रशासन पर दबाव और समाज में नई ऊर्जा पैदा की है।
चेतावनी साफ: न्याय मिला तो ठीक, वरना आंदोलन और उग्र होगा विधायक डोडियार ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
विधायक डोडियार की सक्रियता ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे क्षेत्र के आदिवासियों को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने दिखाया कि सच्चा नेता वही है जो मुश्किल वक्त में सामने आकर आवाज उठाए, आर्थिक सहयोग दे और प्रशासन को भी खरी-खरी सुनाए।
उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन अब गंभीरता दिखाएगा और मामले की निष्पक्ष, तेज जांच कर न्याय सुनिश्चित करेगा।
रिपोर्टर- जितेंद्र कुमावत