सैलाना क्षेत्र के सकरावदा गांव से एक बेहद मार्मिक और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां शादी की खुशियां देखते ही देखते गहरे मातम में बदल गईं। जिस घर में बेटी की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं, वहीं अचानक आई इस त्रासदी ने पूरे माहौल को शोक में डुबो दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सकरावदा निवासी रमेश पिता अमरू निनामा (उम्र लगभग 45-50 वर्ष) की पुत्री का विवाह आज संपन्न होना था। चंद्रगढ़ से बारात आने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। घर में रिश्तेदारों और मेहमानों का जमावड़ा लगा हुआ था और सभी शादी की रस्मों में व्यस्त थे।
इसी बीच घटना सुबह 9:30 बजे के आसपास अचानक रमेश निनामा की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें घबराहट महसूस हुई और उन्होंने पानी मांगा। परिवार के लोग कुछ समझ पाते या उन्हें अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करते, उससे पहले ही उन्होंने मौके पर दम तोड़ दिया। इस अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
जिस आंगन मेंआज शाम को घर के बाहर बरात की शहनाइयां गूंजने वाली थीं, वहां अब चीख-पुकार सुनाई दे रही है। बेटी की विदाई से पहले ही पिता का साया उठ जाना पूरे परिवार के लिए असहनीय पीड़ा बन गया है। इस घटना ने न केवल परिजनों बल्कि पूरे गांव को गमगीन कर दिया है।
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत
बेटी के हाथ पीले होने से पहले उठी पिता की अर्थी : सकरावदा गांव में मातम....
सैलाना क्षेत्र के सकरावदा गांव से एक बेहद मार्मिक और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां शादी की खुशियां देखते ही देखते गहरे मातम में बदल गईं। जिस घर में बेटी की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं, वहीं अचानक आई इस त्रासदी ने पूरे माहौल को शोक में डुबो दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सकरावदा निवासी रमेश पिता अमरू निनामा (उम्र लगभग 45-50 वर्ष) की पुत्री का विवाह आज संपन्न होना था। चंद्रगढ़ से बारात आने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। घर में रिश्तेदारों और मेहमानों का जमावड़ा लगा हुआ था और सभी शादी की रस्मों में व्यस्त थे।
इसी बीच घटना सुबह 9:30 बजे के आसपास अचानक रमेश निनामा की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें घबराहट महसूस हुई और उन्होंने पानी मांगा। परिवार के लोग कुछ समझ पाते या उन्हें अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करते, उससे पहले ही उन्होंने मौके पर दम तोड़ दिया। इस अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
जिस आंगन मेंआज शाम को घर के बाहर बरात की शहनाइयां गूंजने वाली थीं, वहां अब चीख-पुकार सुनाई दे रही है। बेटी की विदाई से पहले ही पिता का साया उठ जाना पूरे परिवार के लिए असहनीय पीड़ा बन गया है। इस घटना ने न केवल परिजनों बल्कि पूरे गांव को गमगीन कर दिया है।