रतलाम / सैलाना....
नगर परिषद सैलाना द्वारा 18.98 लाख रुपए की डी-स्लेजिंग मशीन एवं ट्रैक्टर खरीदी को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। क्षेत्रीय विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा लगाए गए कथित घोटाले के आरोपों के बाद मंगलवार को नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला ने परिषद कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर पूरे मामले का विस्तृत खुलासा किया और आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि जब अभी तक मशीन का भुगतान ही नहीं हुआ, तो घोटाले का सवाल ही नहीं उठता।
अध्यक्ष शुक्ला ने कहा कि विधायक द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों से परे हैं और इससे नगर परिषद की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज पूर्व में विधायक को उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जिनमें साफ उल्लेख है कि खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार हुई है तथा भुगतान की प्रक्रिया अभी लंबित है। ऐसे में इसे घोटाला बताना जनता को भ्रमित करने जैसा है।
शुक्ला ने बताया कि नगर परिषद ने 29 नवंबर 2024 को डी-स्लेजिंग मशीन मय ट्रैक्टर खरीदने हेतु शासन को प्रस्ताव भेजा था। 26 दिसंबर 2024 को परिषद की पीआईसी बैठक में प्रशासकीय स्वीकृति दी गई और 2 जून 2025 को शासन से अनुमति प्राप्त हुई। इसके बाद 6 जून 2025 को ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। कुल 8 टेंडर प्राप्त हुए, जिनमें से 6 तकनीकी रूप से अपात्र पाए गए। शेष दो टेंडरों में हिंद ट्रेडिंग कंपनी, इंदौर का 18 लाख 98 हजार रुपए का प्रस्ताव सबसे उपयुक्त पाया गया, जिस पर 3 नवंबर 2025 को कार्यादेश जारी किया गया।
कंपनी ने 6 नवंबर 2025 को मशीन और ट्रैक्टर नगर परिषद को उपलब्ध करा दिए। इसके बाद 6 फरवरी 2026 को जावरा पॉलिटेक्निक कॉलेज के दो तकनीकी विशेषज्ञों से मशीन का भौतिक सत्यापन कराया गया। 9 मार्च 2026 को प्राप्त तकनीकी रिपोर्ट में मशीन संतोषजनक पाई गई।
अध्यक्ष ने आगे बताया कि 13 मई 2026 को शासन ने संयुक्त खाते में 17 लाख 10 हजार रुपए की राशि जमा कराई है, लेकिन अंतिम भुगतान वरिष्ठ कार्यालय द्वारा किया जाना है, जो अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भुगतान लंबित है और किसी सक्षम एजेंसी द्वारा अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई, तो इसे घोटाला कहना किस आधार पर उचित है।
पत्रकार वार्ता में नगर परिषद के अधिकारी एवं स्थानीय प्रेस क्लब अध्यक्ष सुरेश मालवीय एवं वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे। अध्यक्ष शुक्ला ने कहा कि राजनीतिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच होना जरूरी है, अन्यथा इससे जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं की साख पर अनावश्यक असर पड़ता है।
अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और जानकारी के बाद यह मामला अब जांच के दायरे में दिखाई दे रहा है। क्षेत्रीय विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा लगाए गए जोरदार आरोप और नगर परिषद अध्यक्ष की सफाई, दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति का खुलासा केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव होगा।
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फिलहाल किसी एक पक्ष को सही या गलत ठहराना जल्दबाजी होगी। संबंधित दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कौन पक्ष तथ्यात्मक रूप से सही है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत