रतलाम....
शहर के रामदेवजी की घाटी स्थित प्राचीन श्री कृष्ण मंदिर को लेकर मंगलवार को सनातन समाज, श्रद्धालुओं एवं विभिन्न धार्मिक संगठनों ने जोरदार आवाज उठाई। पीठाधीश्वर पूज्य श्री श्री स्वामी कृष्णानंद जी महाराज, बगलामुखी शक्तिपीठ खाचरोद जिला उज्जैन के सानिध्य में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी महोदया को ज्ञापन सौंपकर मंदिर को मुक्त कराने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि सैकड़ों वर्षों पुराना श्री कृष्ण मंदिर सनातन संस्कृति और आस्था का प्रतीक है, लेकिन वर्तमान में कथित रूप से कुछ लोगों द्वारा मंदिर की भूमि को अपने नाम दर्ज करवाकर उसका अवैध तरीके से क्रय-विक्रय किया जा रहा है। श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि चंद रुपयों के लालच में मंदिर की पवित्र भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में बेचा जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
ज्ञापन में आरटीआई दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 1976 में उक्त भूमि श्री कृष्ण मंदिर के नाम दर्ज थी। बावजूद इसके कथित रूप से अवैध तरीके से भूमि के दस्तावेज तैयार कर विक्रय किया गया। समाजजनों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की।
श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि वर्तमान में मंदिर पर ताले लगे हुए हैं और नियमित पूजा-पाठ नहीं हो पा रहा है। मंदिर में विराजमान प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन तक श्रद्धालुओं को नहीं करने दिए जा रहे। इस स्थिति को लेकर समाज में भारी रोष व्याप्त है। ज्ञापन के दौरान “जय श्री कृष्ण” और “जय सनातन धर्म” के नारों से परिसर गूंज उठा।
सनातन समाज ने प्रशासन से मांग की कि प्राचीन श्री कृष्ण मंदिर को तत्काल प्रशासनिक संरक्षण में लिया जाए, मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोला जाए, मंदिर भूमि पर भव्य जीर्णोद्धार कराया जाए तथा कथित अवैध भूमि विक्रय से जुड़े दस्तावेज निरस्त किए जाएं।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत समाज, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी मौजूद रहे। समाजजनों ने कहा कि यह केवल एक मंदिर का मामला नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और धार्मिक धरोहर की रक्षा का विषय है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत