मातेश्व री सरस्वती के 61वें पुण्य स्मृति दिवस पर बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्स जुटे
नीमच : अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के 61 वें स्मृति पुण्य दिवस पर ज्ञान मार्ग स्थित विशाल सद्भावना सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया । यह कार्यक्रम ब्रह्ममुर्हूत्त से ही प्रारंभ हो गया । इस प्रात: कालीन आध्यात्मिक समागम में बहुत बड़ी संख्या में नीमच के ब्रह्मावत्सों ने भाग लिया । इस समागम में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘मातेश्वहरी जगदम्बा मम्मा ने परमात्मा की हर आज्ञा को शिरोधार्य कर अपने स्वरूप को उन शिक्षाओं के अनुसार ढाला । मातेश्व री मम्मा हमेशा ध्यान दिलाती थी कि हर घड़ी को अपनी अंतिम घड़ी समझ कर हर कर्म करें तो सदैव सुकर्म ही होंगे। आपने अपने दिव्य चाल चलन और चरित्र से लाखों ब्रह्मावत्सों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया एवं उनकी हर समस्या का समाधान भी दिया ।’’
लगभग दो घंटे चले इस विशाल आध्यात्मिक समागम में सामुहिक राजयोग ध्यान एवं सत्संग के साथ ही महाभोग का आयोजन भी रखा गया । कार्यक्रम के अंत में सभी को आत्म स्मृति का तिलक लगाकर महाभोग प्रसादी वितरित की गई ।
शहर : हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझ पुण्य कर्म करो - मातेश्वरी की शिक्षा
मातेश्व री सरस्वती के 61वें पुण्य स्मृति दिवस पर बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्स जुटे
नीमच : अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के 61 वें स्मृति पुण्य दिवस पर ज्ञान मार्ग स्थित विशाल सद्भावना सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया । यह कार्यक्रम ब्रह्ममुर्हूत्त से ही प्रारंभ हो गया । इस प्रात: कालीन आध्यात्मिक समागम में बहुत बड़ी संख्या में नीमच के ब्रह्मावत्सों ने भाग लिया । इस समागम में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘मातेश्वहरी जगदम्बा मम्मा ने परमात्मा की हर आज्ञा को शिरोधार्य कर अपने स्वरूप को उन शिक्षाओं के अनुसार ढाला । मातेश्व री मम्मा हमेशा ध्यान दिलाती थी कि हर घड़ी को अपनी अंतिम घड़ी समझ कर हर कर्म करें तो सदैव सुकर्म ही होंगे। आपने अपने दिव्य चाल चलन और चरित्र से लाखों ब्रह्मावत्सों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया एवं उनकी हर समस्या का समाधान भी दिया ।’’
लगभग दो घंटे चले इस विशाल आध्यात्मिक समागम में सामुहिक राजयोग ध्यान एवं सत्संग के साथ ही महाभोग का आयोजन भी रखा गया । कार्यक्रम के अंत में सभी को आत्म स्मृति का तिलक लगाकर महाभोग प्रसादी वितरित की गई ।