रतलाम। करीब 12 वर्ष पुराने चर्चित बैंक धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार मामले में रतलाम की विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया बड़ावदा शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक नेविल कावराना को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने मंगलवार को फैसला सुनाया। शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने की।
प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन एवं सहायक निदेशक अभियोजन श्रीमती आशा शाक्यवार ने बताया कि बड़ावदा शाखा में नेविल कावराना के स्थानांतरण के बाद पदस्थ हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुमित जैन ने बैंक की आंतरिक जांच के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया। इसके बाद उन्होंने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) उज्जैन को विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी जिसके आधार पर अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू हुई।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2012 से 2014 के दौरान तत्कालीन शाखा प्रबंधक नेविल कावराना ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के बिजनेस फैसिलिटेटर देवेन्द्र साण्ड तथा अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से बैंक में वित्तीय घोटाला किया।
आरोप है कि क्षेत्र के किसानों और खाताधारकों की जानकारी एवं सहमति के बिना उनके किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य खातों से राशि डेबिट की जाती थी। इसके बाद फसल बीमा कंपनियों चोलामंडलम एमएस इंश्योरेंस और एलआईसी ऑफ इंडिया सहित शासकीय राजस्व मद के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते थे लेकिन संबंधित संस्थाओं को भेजने के बजाय उन्हें सिस्टम में निरस्त कर दिया जाता था।
निरस्त की गई राशि आरोपी नेविल कावराना अपने स्वयं के खाते तथा अपनी पत्नी खुर्शीद खोखरी कावराना अपनी माता यास्मिन कावराना अपने रिश्तेदार गुलनार कावराना शहजाद मेहता जीमी खोखरी तथा बिजनेस फैसिलिटेटर देवेन्द्र साण्ड उसकी पत्नी प्रीती सुधा साण्ड एवं उसकी माता कांता साण्ड के खातों में स्थानांतरित कर अवैध रूप से निकाल लेता था। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के सेंड्री क्रेडिटर खातों और लाभ-हानि मद से भी राशि निकालकर निजी खातों में जमा कराई गई।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन ने विवेचना पूरी कर नेविल कावराना देवेन्द्र साण्ड खुर्शीद खोखरी कावराना कांता साण्ड प्रीती सुधा साण्ड यास्मिन कावराना गुलनार कावराना शहजाद मेहता तथा जीमी खोखरी के विरुद्ध विशेष न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान देवेन्द्र साण्ड और कांता साण्ड का निधन हो गया।
लंबी सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी नेविल कावराना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 एवं 13(1)(क)(ख) तथा भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-बी 409 एवं 420 के तहत दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। वहीं खुर्शीद खोखरी कावराना प्रीती सुधा साण्ड यास्मिन कावराना गुलनार कावराना शहजाद मेहता और जीमी खोखरी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
यह फैसला बैंकिंग प्रणाली में भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। विशेष रूप से किसानों और खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले मामलों में न्यायालय के इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत