भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर मनरेगा, ग्रामीण रोजगार और किसानों के मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार योजनाओं का नाम बदलकर केवल प्रचार कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर मजदूरों और किसानों को उनका हक नहीं मिल रहा। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार पिछले दस वर्षों में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार भी सुनिश्चित नहीं कर सकी, ऐसे में 125 दिन रोजगार देने की घोषणा केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।
कुणाल चौधरी ने कहा कि मनरेगा जैसी विश्व की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलकर जी-राम (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन) कर दिया गया है, लेकिन नाम बदलने से न रोजगार बढ़ेगा और न ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार गरीबों के हित में काम करने के बजाय योजनाओं का नाम बदलकर राजनीतिक लाभ लेने में लगी है।
उन्होंने विधानसभा में कांग्रेस विधायकों प्रताप ग्रेवाल एवं पंकज उपाध्याय द्वारा पूछे गए प्रश्न का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि प्रदेश के 52 जिलों में पिछले दस वर्षों के दौरान मनरेगा के तहत पंजीकृत मजदूरों में से एक प्रतिशत से भी कम मजदूरों को 100 दिन का रोजगार मिल सका। उन्होंने कहा कि जब सरकार अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकी, तब 125 दिन रोजगार देने का दावा पूरी तरह खोखला है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी सरकार ने लाखों गरीब मजदूरों के जॉब कार्ड समाप्त कर दिए। उनके अनुसार वर्ष 2020-21 में 43 लाख से अधिक तथा वर्ष 2021-22 में 7.71 लाख से अधिक जॉब कार्ड हटाए गए, जिससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद मजदूर रोजगार की व्यवस्था से बाहर हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि वन अधिकार पट्टा धारकों को कानून के तहत 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान होने के बावजूद वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 24 जिलों में एक भी पात्र श्रमिक को इसका लाभ नहीं मिला।
कुणाल चौधरी ने केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चार सवाल भी पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या मनरेगा का नाम बदलने से रोजगार बढ़ जाएगा, जब 100 दिन की कानूनी गारंटी पूरी नहीं हुई तो 125 दिन रोजगार किस आधार पर देने की बात की जा रही है, करोड़ों पंजीकृत मजदूरों में से एक प्रतिशत से भी कम लोगों को 100 दिन का रोजगार क्यों मिला और सरकार पिछले दस वर्षों का श्वेत पत्र जारी कर वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं करती।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। कुणाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश में लगभग 20 लाख मीट्रिक टन मूंग उत्पादन होने के बावजूद सरकार ने केवल 4.5 लाख मीट्रिक टन मूंग की एमएसपी पर खरीदी की अनुमति दी है, जिससे अधिकांश किसान अपनी उपज उचित मूल्य पर बेचने से वंचित रह जाएंगे।
उन्होंने मांग की कि प्रदेश के प्रत्येक किसान की 100 प्रतिशत मूंग की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार किसान और मजदूर विरोधी नीतियां अपना रही है तथा झूठे वादों और नई घोषणाओं के जरिए अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी। पत्रकार वार्ता में पूर्व प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट, राहुल राज एवं मिथुन अहिरवार भी उपस्थित रहे।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत