रतलाम/सैलाना। नगर के सबसे व्यस्त बस स्टैंड परिसर में स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स के बाहर बनी करीब 15 जर्जर दुकानों ने अब लोगों की जान पर सीधा खतरा खड़ा कर दिया है। हाल ही में एक बंद पड़ी दुकान का भारी छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। यह महज संयोग था कि उस समय वहां कोई राहगीर, यात्री या दुकानदार मौजूद नहीं था, अन्यथा यह घटना बड़ी जनहानि में बदल सकती थी। लेकिन इस चेतावनी के बावजूद प्रशासन की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इन दुकानों को काफी पहले ही तकनीकी परीक्षण के बाद अत्यंत जर्जर और खतरनाक घोषित कर चुका है। इसके आधार पर नगर परिषद ने दुकानदारों को दुकानें खाली करने के नोटिस जारी किए थे। सात दुकानदारों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए दुकानें खाली कर दीं जबकि कुछ दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद नगर परिषद को सभी संबंधित पक्षों की सुनवाई कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। तत्कालीन सीएमओ मनोज शर्मा ने आदेश का पालन करते हुए बैठक आयोजित की, दुकानदारों की आपत्तियां सुनीं और दोबारा नोटिस जारी किए। इसके बाद कुछ व्यापारी पुनः हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन अदालत ने किसी भी प्रकार की राहत या स्थगन आदेश देने से इनकार करते हुए मामला जिला प्रशासन के सुपुर्द कर याचिका का निराकरण कर दिया।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। जब पीडब्ल्यूडी भवनों को खतरनाक घोषित कर चुका है, नगर परिषद अपनी प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और न्यायालय भी मामला जिला प्रशासन को सौंप चुका है तो फिर कार्रवाई आखिर क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे?
बारिश शुरू होते ही खतरा कई गुना बढ़ चुका है। लगातार नमी और बारिश से जर्जर दीवारें, कमजोर छज्जे और पुरानी छतें कभी भी भरभराकर गिर सकती हैं। हाल ही में छज्जा गिरने की घटना इस खतरे की प्रत्यक्ष चेतावनी है। यदि अगली बार यह हादसा दिन के व्यस्त समय में हुआ, तो इसकी चपेट में दर्जनों लोग आ सकते हैं।
सैलाना बस स्टैंड नगर का सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों यात्री स्कूली बच्चे महिलाएं बुजुर्ग व्यापारी और वाहन गुजरते हैं। दुकानों के सामने हर समय लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में इन जर्जर भवनों का खड़ा रहना किसी टिक-टिक करते टाइम बम से कम नहीं माना जा सकता।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मान सकता। यदि खतरा स्पष्ट है तो तत्काल क्षेत्र को असुरक्षित घोषित कर जर्जर दुकानों को हटाने जैसी कार्रवाई होना चाहिए। हर गुजरते दिन के साथ खतरा बढ़ता जा रहा है।
अब पूरा नगर एक ही सवाल पूछ रहा है—क्या प्रशासन किसी मासूम की मौत के बाद हरकत में आएगा, या फिर समय रहते ऐसा निर्णय लेगा जिससे एक संभावित बड़ी त्रासदी को रोका जा सके? फिलहाल सैलाना बस स्टैंड पर खड़ी ये जर्जर दुकानें प्रशासनिक सुस्ती की गवाही दे रही हैं और हर गुजरते व्यक्ति को अनजाने खतरे के साए में जीने को मजबूर कर रही हैं।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत