रावटी (रतलाम)। रावटी स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस बालिका छात्रावास में सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों, जर्जर भवन की स्थिति और छात्रावास चार दिनों से बंद होने के मामले ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। शिकायत सामने आने के बाद जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया, जबकि जिला शिक्षा समिति अध्यक्ष ने भी जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
छात्राओं द्वारा दिए गए हस्तलिखित शिकायत पत्र में छात्रावास अधीक्षिका सुरेखा पाटीदार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्राओं का कहना है कि एक माह बीत जाने के बाद भी उन्हें शासन द्वारा मिलने वाला तेल, साबुन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। शिकायत में यह भी आरोप है कि प्रतिदिन बेहद सीमित मात्रा में दूध और सब्जी दी जाती है तथा पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से सप्ताह में केवल दो बार टैंकर बुलाया जाता है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि टैंकर के लिए उनसे 300 रुपये तक लिए गए, जबकि नियमित स्नान करने पर घर से पैसे लाने की बात कही जाती थी।
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब छात्राएं मूलभूत सुविधाओं की मांग करती थीं तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता था कि सरकार पर्याप्त बजट नहीं देती। इतना ही नहीं, छात्राओं का आरोप है कि शिकायत करने या अपने अभिभावकों को वास्तविक स्थिति बताने पर उन्हें एसएलसी दिलाने की धमकी तक दी जाती थी।
मामले का सबसे गंभीर पहलू छात्रावास भवन की हालत है। लगातार बारिश के कारण भवन की छत से पानी टपकने, दीवारों और छत से कांच गिरने तथा भवन के असुरक्षित होने की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय लोगों के अनुसार सुरक्षा को देखते हुए छात्राओं को चार दिन पहले घर भेज दिया गया और तब से छात्रावास पूरी तरह बंद पड़ा है। इससे छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा समिति, अध्यक्ष केशु निनामा जिला शिक्षा केंद्र के जिला समन्वयक अखिलेश राजपूत ने एपीसी मुकेश राठौर, जन शिक्षक धर्मेन्द्र सिंह राठौर, जन शिक्षक गोपाल टांक, छात्रावास अधीक्षक नवीन बोरिया तथा प्राचार्य अमर सिंह भाभर, के साथ छात्रावास का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्राओं, उनके अभिभावकों तथा स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। निरीक्षण के बाद क्षतिग्रस्त भवन में छात्राओं को नहीं रखने का निर्णय लेते हुए 100 सीटर ब्रिज कोर्स छात्रावास को पूर्व कन्या हाई स्कूल, रावटी भवन में संचालित करने के निर्देश जारी किए गए।
इधर, इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा समिति, रतलाम के अध्यक्ष केशु निनामा ने भी स्पष्ट कहा कि शासन प्रत्येक छात्रावास के लिए तेल, साबुन सहित आवश्यक दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध कराता है और इन्हें छात्राओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी छात्रावास वार्डन की होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्रावास में छात्राओं को सामान घर से खरीदकर लाने के लिए मजबूर किया गया है या शासन की सामग्री वितरित नहीं की गई है, तो यह गंभीर लापरवाही है।
उन्होंने घोषणा की कि मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम गठित की जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध तत्काल एवं सख्त कार्रवाई की जाएगी।
केशु निनामा ने यह भी स्वीकार किया कि छात्रावास भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण छात्राओं को वहां नहीं रखा जा सका। उन्होंने बताया कि पुराने हायर सेकेंडरी स्कूल भवन की मरम्मत कर उसे छात्रावास के रूप में तैयार किया जा रहा है और इसी सप्ताह छात्राओं को वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
इस पूरे घटनाक्रम ने आदिवासी अंचल में संचालित छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
सभी की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, छात्राओं को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, पौष्टिक भोजन और शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत