रतलाम/सैलाना। प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के लिए आने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण और चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से विद्यार्थियों को पढ़ाकर उन्हें जीवन में आगे बढ़ाने वाले अनेक वरिष्ठ शिक्षक अब स्वयं योग्यता की कसौटी पर खड़े होने की तैयारी कर रहे हैं। 12 अक्टूबर से प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर शिक्षकों के बीच असमंजस, चिंता और भविष्य की नौकरी को लेकर बेचैनी का माहौल है। खासकर 50 वर्ष से अधिक उम्र के वे शिक्षक परेशान हैं, जिन्हें ऑनलाइन परीक्षा की प्रक्रिया और दोबारा परीक्षा देने की अनिवार्यता चुनौतीपूर्ण लग रही है।
मामला शिक्षा के अधिकार कानून (RTE Act) और शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर में गैर-टीईटी शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करने की शर्त को लेकर स्थिति गंभीर हुई है। हालांकि, सरकार की ओर से राहत के प्रयास भी किए गए हैं और इस मामले में पुनर्विचार याचिका के जरिए पुराने शिक्षकों को छूट देने की मांग की गई है।
2009 के कानून से शुरू हुआ विवाद
केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया था। मध्यप्रदेश में इसे वर्ष 2011 में लागू किया गया। कानून के तहत शिक्षक नियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षणिक और पात्रता मापदंड तय किए गए। मध्यप्रदेश में वर्ष 2005 से शिक्षक भर्ती से पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा की व्यवस्था भी शुरू हो चुकी थी। इससे पहले नियुक्त हुए अनेक शिक्षक बिना TET परीक्षा के ही वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं।
सरकार ने अपने पक्ष में यह तर्क रखा है कि पुराने शिक्षकों को, विशेषकर 2005 और उसके बाद नियुक्त हुए ऐसे शिक्षकों को जिन्होंने अन्य निर्धारित पात्रताएं पूरी की हैं, TET की अनिवार्यता से राहत दी जाए। इस मांग पर न्यायालय में पुनर्विचार की प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
55 वर्ष की उम्र वालों को मिल सकती है बड़ी राहत
न्यायालय के आदेशों की मौजूदा स्थिति में एक महत्वपूर्ण राहत यह है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम समय बचा है, उन्हें TET की अनिवार्यता से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है। इसकी समयसीमा को आगे बढ़ाकर 30 अगस्त 2028 तक किया गया है।
इसका सीधा फायदा उन शिक्षकों को हो सकता है जो वर्तमान में लगभग 55 वर्ष की आयु के हैं। अगले दो वर्षों में वे उस आयु सीमा तक पहुंच जाएंगे जहां सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष का समय शेष रहने पर उन्हें इस अनिवार्यता से राहत मिल सकती है। वहीं अपेक्षाकृत कम उम्र के शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना नौकरी की निरंतरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।
ऑनलाइन परीक्षा बनी वरिष्ठ शिक्षकों के लिए चुनौती
सबसे बड़ी चिंता परीक्षा के ऑनलाइन होने को लेकर सामने आ रही है। वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे कई वरिष्ठ शिक्षक कंप्यूटर और ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली के अभ्यस्त नहीं हैं। उनका कहना है कि जिस उम्र में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को पढ़ाकर तैयार किया, उस उम्र में स्वयं ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है।
एक शिक्षक का तर्क है कि पढ़ने और पढ़ाने की उम्र में अंतर होता है। जिस उम्र में शिक्षक का काम ज्ञान देना है, उस उम्र में दोबारा परीक्षा की तैयारी करवाना कितना व्यावहारिक है? शिक्षकों का यह भी सवाल है कि यदि लंबे अनुभव वाले अधिकारियों को इसी तरह दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए कहा जाए तो क्या व्यवस्था उतनी ही सहजता से लागू हो पाएगी?
चार अवसर, फिर नौकरी पर संकट की आशंका
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार शिक्षकों को निर्धारित अवधि में परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए चार अवसर मिलने की बात सामने आ रही है। यदि शिक्षक इन अवसरों में भी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाते हैं तो न्यायालय के मौजूदा आदेशों के अनुसार उनकी सेवा को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में पहली परीक्षा में कम संख्या में शिक्षकों के सफल होने का उदाहरण भी मध्यप्रदेश के शिक्षकों की चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों की परीक्षा व्यवस्था, नियम और परिणामों की तुलना करते समय आधिकारिक आंकड़ों को आधार बनाना जरूरी होगा।
रतलाम जिले में भी हजारों शिक्षक प्रभावित होने की आशंका
यदि न्यायालय का मौजूदा रुख कायम रहता है और पुराने शिक्षकों को अपेक्षित राहत नहीं मिलती है तो रतलाम जिले सहित पूरे मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। सैलाना, रतलाम और जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से सेवाएं दे रहे वरिष्ठ शिक्षक अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
फिलहाल शिक्षकों की नजर न्यायालय में चल रही पुनर्विचार प्रक्रिया, सरकार के अगले कदम और परीक्षा संबंधी अंतिम दिशा-निर्देशों पर टिकी है। आने वाले समय में यह मामला केवल परीक्षा का नहीं बल्कि अनुभव बनाम नई पात्रता व्यवस्था का बड़ा सवाल बन सकता है। प्रदेश के हजारों शिक्षक चाहते हैं कि वर्षों की सेवा और अनुभव को ध्यान में रखते हुए सरकार तथा न्यायालय उनके लिए ऐसी व्यवस्था करें जिससे उनकी नौकरी और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत