रतलाम / बाजना। श्री संघ बाजना में अत्यंत श्रद्धा, वैराग्य और आध्यात्मिक भावनाओं के बीच प्रवचन प्रभाविका प.पू. साध्वीवर्या सौम्ययशा श्रीजी म.सा. का कालधर्म हुआ। साध्वीश्री ने 24 दिन के अनशन तप की कठिन साधना पूर्ण करते हुए अंतिम चरण में चौंविहार अठम पच्चखान के साथ समाधिपूर्वक देह का त्याग किया। दोपहर 12:39 बजे उन्होंने शांत भाव से समाधि पूर्वक कालधर्म प्राप्त किया। उनके कालधर्म से श्री संघ एवं जैन समाज में शोक के साथ-साथ उनकी तपस्या, संयम और आध्यात्मिक साधना के प्रति गहरी श्रद्धा का भाव व्याप्त है।
साध्वीवर्या सौम्ययशा श्रीजी म.सा. का आध्यात्मिक जीवन तप, त्याग, संयम और धर्म आराधना के लिए समर्पित रहा। वे आगोमोद्धारक सागरानंद सूरीश्वरजी महाराजा के समुदायवर्तिनी मालवदेश दीपिका मनोहर श्रीजी म.सा. की शिष्या, मालवज्योति गुरुवर्या इंदु श्रीजी म.सा. की शिष्या तथा मालव के वरिष्ठ वात्सल्यवारिधी पू. हेमेन्द्र श्रीजी म.सा. की लघु भगिनी थीं। उनकी प्रवचन प्रभाविका के रूप में भी विशिष्ट पहचान रही।
साध्वीश्री की तप-साधना के दौरान श्री संघ सहित त्रिविध संघ की उपस्थिति में नमस्कार महामंत्र का स्मरण किया गया। 24 दिन के अनशन तप के साथ उन्होंने आध्यात्मिक साधना की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जो समाज के लिए लंबे समय तक प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
साध्वीश्री की अंतिम यात्रा के रूप में 20 अगस्त 2026 को प्रातः 9 बजे पालकी की बोली लगाई जाएगी। इसके बाद प्रातः 11 बजे पालकी निकाली जाएगी। पालकी कार्यक्रम का स्थान सौम्य आराधना भवन (जैन उपाश्रय), कर्नाटक चौराहा, बाजना रहेगा।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाजजन, श्री संघ के सदस्य, धर्मावलंबी एवं श्रद्धालुजन उपस्थित होकर साध्वीश्री को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। पूरे आयोजन में धर्म, श्रद्धा, संयम और वैराग्य का वातावरण रहेगा। साध्वीश्री की तपस्या और समाधि जैन समाज के लिए एक अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी अध्याय के रूप में स्मरण की जाएगी।