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पेयजल का भीषण संकट : दशकों पहले पूर्व मंत्री के कार्यकाल में लगा एकमात्र हैंडपंप भी खत्म, सिर्फ एक टंकी से प्यास बुझा रही पूरी आबादी। बुनियादी ढांचे का सूपड़ा साफ : सीसी सड़क न होने से कीचड़ में चलने को विवश ग्रामीण, जर्जर स्कूल भवन हुआ जमींदोज। राका का अल्टीमेटम : कांग्रेस नेता प्रकाश राका बोले— पीड़ित जनता के न्याय के हक में सदैव तत्पर रहूंगा, जल्द समाधान नहीं तो आंदोलन। नीमच। जावद विधानसभा क्षेत्र को विकास और शिक्षा के मामले में अव्वल बताने वाले राजनैतिक दावों की कलई विधायक ओमप्रकाश सखलेचा के स्वनिवास व फार्म हाउस नक्षत्र वाटिका से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कैनपुरिया में पूरी तरह खुल गई है। यहाँ की जमीनी हकीकत देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा कि आज के आधुनिक युग में भी करीब 60 परिवारों और 240 की आबादी वाला एक पूरा गांव बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। इस बदहाली को जब क्षेत्र के कांग्रेस के कद्दावर नेता श्री प्रकाश राका ने स्वयं देखा, तो उन्होंने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। दशकों पुराने हैंडपंप के भरोसे था गांव, वह भी हुआ खत्म; नल-जल योजना सिर्फ दिखावा पेयजल संकट की भयावहता को बयां करते हुए भावुक होकर ग्राम वासियों ने एक बड़ा खुलासा किया। ग्रामीणों ने बताया कि, इस गांव में पेयजल के नाम पर वर्षों पहले पूर्व मंत्री घनश्याम पाटीदार के कार्यकाल में सिर्फ एक हैंडपंप लगा था, जो अब पूरी तरह से जर्जर होकर खत्म हो चुका है। इसके बाद से आज तक प्रशासन ने गांव में पानी पीने का कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं कराया। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन नलों में पानी का एक कतरा तक नहीं टपका। वर्तमान में पूरी 240 की आबादी मात्र एक पानी की टंकी के भरोसे किसी तरह अपनी प्यास बुझा रही है, जिससे रोज विवाद होते हैं। सीसी सड़क तक नहीं, कीचड़ के दलदल में ग्रामीण कैनपुरिया की सबसे बड़ी दुर्दशा गांव के अंदर घुसते ही दिखाई देती है। गांव की गलियों में आज तक सीसी सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। थोड़ी सी लापरवाही और जलभराव के कारण पूरी गलियां कीचड़ और दलदल के मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। स्कूली बच्चों को बस्ता टांगकर इसी दलदल से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे कई बार बच्चे फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। सरकारी स्कूल हुआ जर्जर, फैक्ट्री के भरोसे नौनिहाल शिक्षा में अव्वल होने के दावों को ठेंगा दिखाती यहाँ की सरकारी स्कूल बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर होकर डिस्मेंटल (ध्वस्त) हो चुकी है। शासन-प्रशासन की तरफ से बच्चों की पढ़ाई की कोई वैकल्पिक व्यवस्था या नए भवन की स्वीकृति नहीं की गई है। वर्तमान में यह स्कूल विक्रम सीमेंट फैक्ट्री के सामाजिक सरोकार (CSR) के अनुदान से किसी अन्य जगह संचालित हो रहा है। बिजली और सुरक्षा के नाम पर सिर्फ धोखा ग्रामीणों ने बताया कि स्ट्रीट लाइटों पर बल्ब साल में सिर्फ एक बार दीपावली पर टिमटिमाते हैं, बाकी के 364 दिन गांव अंधेरे के साए में रहता है। इसके अलावा, गांव मुख्य मार्ग पर स्थित होने और आबादी क्षेत्र में एक भी स्पीड ब्रेकर (गति अवरोधक) न होने के कारण आए दिन तेज रफ्तार वाहनों से ग्रामीण दुर्घटनाग्रस्त होकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। पीड़ित जनता के लिए सदैव तत्पर: प्रकाश राका का बड़ा अल्टीमेटम कैनपुरिया गांव की इस दयनीय स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस नेता श्री प्रकाश राका ने ग्रामीणों से रूबरू होकर उनकी समस्याएं सुनीं। राका ने स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को दो टूक लहजे में अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही कैनपुरिया की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेंगे और उग्र आंदोलन व चक्का जाम करेंगे। ग्रामीणों के बीच खड़े होकर श्री राका ने बेहद सकारात्मक और ऊर्जावान शब्दों में जनता को संबोधित करते हुए कहा कैनपुरिया के मेरे सीधे-सरल भाइयों और बहनों, आपको इस बदहाली और कीचड़ में अकेले रहने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इस गांव का हर परिवार मेरा अपना परिवार है। व्यवस्था ने भले ही आपका साथ छोड़ दिया हो, लेकिन आपका यह भाई आपके न्याय के हक के लिए सदैव तत्पर रहेगा। जब तक कैनपुरिया को पक्की सीसी सड़क, बच्चों को नया सरकारी स्कूल, हर घर को पानी और सुरक्षित सफर के लिए स्पीड ब्रेकर नहीं मिल जाता, मैं शांत नहीं बैठूंगा। हम मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे और अपना हक लेकर रहेंगे! श्री राका ने स्पष्ट किया कि न्याय की यह लड़ाई जावद विधानसभा के हर उस गांव तक जाएगी जहां जनता के साथ ऐसा धोखा हो रहा है। रिपोर्ट : दिनेश जी जोशी |