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क्षमापना के साथ श्वेतांबर जैन समाज के पर्युषण पर्व का हुआ समापन चीताखेड़ा । गुरुवार को संवत्सरी के समापन एवं 14 तपस्वियों द्वारा किए गए 45 दिनों तक सिद्धि तप, अठ्ठई तप,16 उपवास, मासक्षमण कठोर तप की तपस्या की पूर्णाहुति के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय महोत्सव का गुरुवार को धार्मिक माहौल से परिपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। अंतिम दिन साध्विवर्या सरल स्वभावी विदुषी साध्वी श्री धृति पूर्णा श्रीजी म.सा.वात्सल्य मूर्ति साध्वी श्री अभय पूर्णा श्री जी म.सा.की पावन प्रेरणा एवं निश्रा में 14 तपस्वियों का शासन माता पूजन, पारणा एवं बहुमान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत सर्वप्रथम साध्विवर्या के सानिध्य में नगर के श्री चंद्रप्रभ व श्री मुनि सुव्रत स्वामी दोनों जिनालयों में शासन माता पूजन का विधान सम्पन्न कराया गया। श्री चंद्र प्रभ बड़ा जिनालय से गाजे-बाजे ,ढोल -ढमाकों के साथ भगवान महावीर के अपने मुखोटे को संचित विशेष रथ में विराजमान कर तथा कोई तपस्वी बग्गी में तो कोई रथ में तो कोई घोड़े पर सवार होकर तपस्वियों का गांव के निर्धारित मार्गो से भव्य वरघोड़ा महावीर के जय घोष के गगनभेदी जयकारा लगाते हुए नाचते झूमते, नृत्य करते हुए बड़े ही ठाट-बाट से निकाला गया। भगवान श्री महावीर स्वामी जी और तपस्वियों का बहुमान हेतु जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए और अक्षत पुष्प वर्षा कर आत्मिय स्वागत किया गया। भव्य वरघोडा में त्रिशला नंदन भगवान महावीर स्वामी विशेष रथ में सवार हुए और श्रावक अपने हाथों से खिंचते हुए चल रहे थे जहां प्रभु बड़े ही निराले ठाट के साथ भक्तों को दर्शन देने निकले महावीर जिनके ठाट को और एक साथ 14 तपस्वियों को देखने के लिए उमडे जैन - अजैन भक्त। वहीं बड़ी संख्या में तपस्वियों ने मास क्षमण एक, सिद्धि तप 5,अठ्ठई तप 7 , और 16 उपवास की कठोर तपस्या की गई जिनको बग्गी,रथ और घोड़े पर बिठाया गया जिनका वृहद रूप से भव्य वरघोड़े में जैन अनुयायियों द्वारा जैनम जयति शासनम .......,वंदे वीरम.........,पार्श्वनाथ की जय..........., महावीर की जय......., नाकोड़ा भैरव की तथा तपस्वी अमर रहे......जय जयघोष के साथ नाचते झूमते गांव के विभिन्न मार्गों से भव्य वरघोड़ा निकाला गया। प्रभु जी के रथ को खिंचने हेतु पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए पूरे रास्ते में होड़ मची रही, भगवान श्री महावीर के रथ को हाथों से खिंचतकर सौभाग्य हर कोई प्राप्त करना चाह रहा था। भव्य वरघोड़ा श्री चंद्रप्रभ स्वामी जिनालय से प्रारंभ हुआ जो नीम चौक,जैन गली, बस स्टैंड से परिभ्रमण करते हुए सदर बाजार होते हुए श्री मुनीसुव्रत स्वामी जिनालय पर पहुंचा जहां निर्बाध रूप से निर्धारित कार्यक्रम जारी रहा।धर्म सभा में साध्विवर्या सरल स्वभावी विदुषी साध्वी श्री धृति पूर्णा श्रीजी म.सा.ने तप , तपस्या की महिमा बताते हुए कहा कि तप केवल शरीर की शुद्धि का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मा के उत्थान का भी महत्वपूर्ण कारण है। तपस्वी ही जिन शासन के सच्चे सेवक हैं। तप के माध्यम से मन एवं आत्मा की शुद्धि संभव है।तथा व्यक्ति अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर सकता है। धर्म सभा में प्रवचन के बाद सभी 14 तपस्वियों का बहुमान के लाभार्थी शांतिलाल, राजेश खिमेसरा (चीताखेड़ा) द्वारा किया गया वहीं सभी तपस्वियों का पारणा कराने का लाभ संतोष कुमार,केवल कुमार बापना, अनिल कुमार, अंकित कुमार नाहटा (कुशलगढ़), श्रीमती रश्मि बेन ,मेहुल कुमार शाह बावला (अहमदाबाद),अभय कुमार, लोकेंद्र कुमार, बंटी मंडलेचा (चीताखेड़ा) ने लिया। सभी तपस्वियों को वधावणा करने का लाभ अभय कुमार, महावीर चंदालिया (राजगढ़) ने लिया। भगवान पोखरने का लाभ श्रीमती दिशा बेन -प्रवेश (उन्हैल) ने लिया। गुरु पुजा करने का लाभ पंचम लाल,अमित गोदावत (चीताखेड़ा) ने लिया। तत्पश्चात सभी का बहुमान किया गया। विशेष आरती के बाद प्रभावना वितरण की गई। जैन श्री संघ के द्वारा कार्यक्रम के अंत में सामूहिक रूप से स्वामीवात्सल्य किया गया। रिपोर्ट : दशरथ माली |