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मंदसौर। मैट्रिमोनियल वैवाहिक प्लेटफॉर्म पर नकली प्रोफाइल बनाकर शादी का झांसा देने और कस्टम ड्यूटी के नाम पर लाखों रुपये ऐंठने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का मंदसौर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने जयपुर राजस्थान और अरवल बिहार में दबिश देकर मुख्य सरगना सहित गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश भर में 100 से अधिक साइबर अपराधों को अंजाम देकर 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। इनके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जुड़े हुए पाए गए हैं। मामला शामगढ़ क्षेत्र का है, जहाँ पीड़िता अल्पना (काल्पनिक नाम) ने एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल अपलोड की थी। आरोपी ने खुद को एनआरआई (NRI) बताकर उससे संपर्क किया। व्हाट्सऐप पर फर्जी फोटो और फर्जी परिजनों से बात करवाकर पीड़िता को शादी का पूरा विश्वास दिलाया गया। ठगों ने विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने का नाटक किया और फिर कस्टम ऑफिसर बनकर गिफ्ट छुड़ाने व सेल्स टैक्स जमा करने के नाम पर डरा-धमकाकर महिला से अलग-अलग बैंक खातों में 7.5 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने थाना शामगढ़ में अपराध क्रमांक 282/26 धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीणा के निर्देशन में शामगढ़ थाना प्रभारी उप-निरीक्षक कपिल सौराष्ट्र व साइबर सेल प्रभारी उप-निरीक्षक सत्येन्द्र सैनी की संयुक्त विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने लगभग डेढ़ से दो महीने तक तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। सुराग मिलने पर उप-निरीक्षक कपिल सोराष्ट्री व उप-निरीक्षक शैलेंद्र सिंह कनेश के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जयपुर (राजस्थान) में दबिश देकर मुख्य आरोपियों को पकड़ा। इसके बाद गिरोह की कड़ी जोड़ते हुए बिहार के अरवल जिले से एक अन्य सदस्य को हिरासत में लिया। गिरोह का मुख्य कॉलर विदेश या दूरदराज के इलाके में बैठकर वैवाहिक साइट्स पर युवक-युवतियों को शादी और एनआरआई होने का झांसा देता था। वहीं गिरोह की एक टीम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली, भोपाल और बिहार से फर्जी/म्यूल मोबाइल सिम और बैंक खाते जुटाती थी। दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाना बदलकर रहती थी, जिनका काम खातों में आए पैसों को एटीएम से निकालना और तुरंत सीडीएम (CDM) मशीनों के जरिए अन्य खातों में जमा करना था। बैंक खाता फ्रीज होते ही ये फर्जी फोन, सिम, एटीएम और पासबुक को नष्ट कर देते थे। आरोपी साइबर अपराध के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का इस्तेमाल कभी व्यक्तिगत कामों के लिए नहीं करते थे और न ही अपने रिश्तेदारों को उनसे कॉल करते थे। प्रत्येक फोन के पीछे एक पर्ची लगी होती थी, जिसमें पीड़ित का नाम और खाता संख्या लिखी होती थी। गिरफ्तार आरोपी, त्रिलोकी कुमार 26 वर्ष निवासी भेलाही, शिवम गुप्ता 25 वर्ष निवासी भेलाही, बबलू कुशवाहा 25 वर्ष निवासी भेलाही, गुंजन गुप्ता 29 वर्ष निवासी भेलाही और शशि कुमार 24 वर्ष निवासी भेलाही जिला पूर्वी चंपारण सहित टोनी कुमार 34 वर्ष निवासी छपिया जिला गोपालगंज बिहार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 फर्जी मोबाइल सिम कार्ड जो विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत तथा 05 एटीएम कार्ड और 8 लाख रुपये से अधिक की राशि विभिन्न बैंक खातों में होल्ड/फ्रीज करवाई गई, जिसे अदालती प्रक्रिया के माध्यम से पीड़िता को सुपुर्द कराया जाएगा। मन्दसौर पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अंजान व्यक्ति द्वारा भेजे गये लिंक को कदापी क्लिक न करे, अविश्वसनीय एवं अंजान व्यक्ति द्वारा ऑनलाईन ट्रेडिंग के झॉसे में नहीं आए। लुभावने ऑफर पर विश्वास न करें तथा अपने गोपनीय व नीजी दस्तावेज जैसे पीन, ओ.टी.पी, पासवर्ड इत्यादि कदापि साझा न करें। फ्राड की घटना घटीत होने पर तत्काल एन.सी.आर.पी. हेल्पलाईन नं. 1930 पर शिकायत दर्ज करें। सायबर अपराधों के प्रति सजगता बरते। |