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विशेष आलेख- जगदीश मालवीय, आगर-मालवा आगर-मालवा को यूं ही चमत्कारों की नगरी नहीं कहा जाता है। यह नगर बाबा बैजनाथ धाम की दिव्य ऊर्जा और अलौकिक लीलाओं का साक्षी रहा है। यहां की पावन धरा पर एक ऐसा चमत्कार घटित हुआ, जिसे आज भी बुजुर्ग श्रद्धा और आश्चर्य के साथ स्मरण करते हैं। मंदिर का इतिहास - एक हजार वर्ष पुरानी आस्था आगर-मालवा जिला मुख्यालय से लगभग 4-5 किलोमीटर दूर उज्जैन-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाणगंगा नदी के तट पर, हरियाली से घिरी पहाड़ियों के बीच श्री बैजनाथ महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर के सामने सती के ओटले पर मौजूद शिलालेख में संवत् 1116 का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी प्राचीनता एक हजार वर्ष से भी अधिक मानी जाती है। इतिहास के अनुसार वर्ष 1528 में बेट बैजनाथ खेड़ा गांव में मोड़ वैश्य समाज के लोगों ने मंदिर की नींव रखी और वर्ष 1536 में इसका निर्माण पूर्ण हुआ। करीब 350 साल तक यह स्थान ज्वालामुखीय पत्थरों की मोटी दीवारों वाले मठ के रूप में रहा। इस मंदिर को देश का इकलौता ऐसा हिन्दू मंदिर माना जाता है, जिसका जीर्णोद्धार किसी भारतीय ने नहीं बल्कि एक अंग्रेज अधिकारी ने करवाया। वर्ष 1879 में आगर छावनी में पदस्थ लेफ्टिनेंट कर्नल सी. मार्टिन को अफगान युद्ध में भेजा गया था। लंबे समय तक पत्नी को कोई समाचार न मिलने पर वे घोड़े पर घूमते हुए बाबा बैजनाथ मंदिर पहुंचीं, जहां पुजारियों के कहने पर उन्होंने 11 दिन तक "ओम नमः शिवाय" का जप कर पति की कुशलता की प्रार्थना की। कुछ सप्ताह बाद कर्नल मार्टिन का पत्र आया कि युद्ध में पठानी सेना से घिर जाने पर त्रिशूलधारी योगी ने प्रकट होकर उनकी रक्षा की। इस चमत्कार के बाद कर्नल मार्टिन दंपति शिवभक्त बन गए और 1883 में 15 हजार रुपये का चंदा कर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जिसका शिलालेख आज भी मंदिर के अग्रभाग में लगा है। जुलाई 1931 की वह चमत्कारी घटना आगर के प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं सिद्ध संत पं. श्री जयनारायण जी उपाध्याय, जिन्हें भक्तगण छोटे बापजी श्री के नाम से जानते हैं, नित्य की भांति श्री बैजनाथ महादेव मंदिर में साधना में लीन थे और समाधिस्थ हो गए। दोपहर लगभग 3 बजे जब उनकी समाधि टूटी, तो उन्हें स्मरण आया कि न्यायालय में एक महत्वपूर्ण मुकदमे की पैरवी करना है। वे व्याकुल होकर अपने साथी गोपाल मंदिर के पुजारी पं. नाथूराम जी दुबे एवं अध्यापक श्री रेवाशंकर जी के साथ बैजनाथ धाम से सीधे आगर के पुराना कोर्ट परिसर की ओर दौड़े। जैसे ही वे अदालत पहुँचे, उनके वकील साथियों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि आपके मुवक्किल बाइज्जत बरी हो गए हैं। आश्चर्यचकित वकील साहब ने कहा, "आप मजाक कर रहे हैं, मैं तो अभी-अभी सीधा बैजनाथ से आ रहा हूँ।" तब तत्कालीन न्यायाधीश मौलवी मुबारिक हसन ने उन्हें मिसल पर उनके हस्ताक्षर दिखाए और कहा कि आप समय पर न्यायालय आए, जोरदार दलीलों के साथ पक्षकार को बरी करवाया और अपनी डायरी में अगले केस की तारीख भी नोट की है। यह सुनकर वकील साहब स्तब्ध रह गए और उन्हें समझते देर न लगी कि स्वयं भगवान श्री बैजनाथ महादेव ने ही उनका रूप धारण कर न्यायालय में उपस्थित होकर मुकदमा लड़ा और जीता है। इस अलौकिक घटना के प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ता श्री चतुर्भुज दास सक्सेना, पं. नाथूराम जी दुबे एवं न्यायालय परिसर में उपस्थित अनेक लोग थे। आगर शहर के बीच में स्थित पुरानी कोर्ट में जहां स्वयं बाबा बैजनाथ ने वकील साहब जय नारायण उपाध्याय जी बावजी के रूप में जज साहब के सामने खड़े होकर मुकदमा लड़कर जीता था। वह कोर्ट रूम आज भी सुरक्षित एवं संरक्षित है। और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। छोटे बापजी श्री का जीवन परिचय मालवा विभूति सद्गुरु श्री नित्यानंद जी बापजी के परम शिष्य श्री जयनारायण जी उपाध्याय का जन्म औदिच्य ब्राह्मण भारद्वाज गोत्रीय उपाध्याय परिवार में दिनांक 23 मार्च 1896 (विक्रम संवत् 1953, चैत्र शुक्ल रामनवमी, सोमवार, दोपहर 12 बजे) को नाना बाजार, आगर-मालवा में श्री बलदेव जी उपाध्याय के यहाँ हुआ था। आपका विवाह वर्ष 1911 में शाजापुर निवासी श्री भिकम जी भट्ट की सुपुत्री कलावती देवी से हुआ। आपने ग्वालियर स्टेट से वकालत की उपाधि प्राप्त कर आगर न्यायालय में वकालत की। वर्ष 1932 से 1945 तक आप पूर्ण रूप से सद्गुरु श्री नित्यानंद जी बापजी की शरण में रहे। भक्तों के बीच आप छोटे बापजी श्री के नाम से प्रसिद्ध हुए। आपने 26 अक्टूबर 1945 को धौसवास, जिला रतलाम में श्री नित्यानंद जी बापजी के सानिध्य में महासमाधि ली। आपने हरिद्वार में प्रणव मंदिर की स्थापना कराई तथा हनुमान विजय, नित्य पाठ दीपिका, सुंदर संदेश, संत रत्नमाला आदि अनेक आध्यात्मिक ग्रंथों की रचना की। आज भी अनवरत है परंपरा नित्यानंद भक्त मंडल आगर-मालवा द्वारा 26 जुलाई 1997 से स्व. पं. मनोहरलाल जी उपाध्याय के माध्यम से प्रारंभ किया गया बापजी श्री का नित्य पाठ एवं महाआरती प्रत्येक गुरुवार को आज भी गुरुभक्तों के यहाँ आयोजित की जाती है। प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में बाबा बैजनाथ धाम में भव्य उत्सव कार्यक्रम का आयोजन नित्यानंद भक्त मंडल आगर-मालवा एवं नित्यानंद ट्रस्ट धार, खंभात, शाजापुर द्वारा किया जाता है। श्रावण में बैजनाथ धाम में उमड़ता है आस्था और विश्वास का जन सैलाब बाबा बैजनाथ धाम आगर मालवा में श्रावण मास में धर्म आस्था और विश्वास का जन सैलाब उमड़ता है। न केवल मालवांचल, प्रदेश बल्कि देश के विभिन्न राज्यों स्थान से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बैजनाथ धाम के दर्शन एवं अभिषेक के लिए यहां पर आते हैं और बाबा के आशीर्वाद से मन वांछित फल एवं मनोकामना पूर्ण होने पर खुशी-खुशी बाबा को हृदय से धन्यवाद देते हुए अपने घर को रवाना होते हैं। श्रावण मास में आगर नगर में अगर के राजाधिराज बाबा बैजनाथ महादेव की भव्य शाही सवारी प्रतिवर्ष भक्त मंडल द्वारा निकाली जाती है। इस भव्य और आकर्षक शाही सवारी में लाखों लोग शामिल होकर बाबा के दर्शन कर आध्यात्मिक सुख का अनुभव करते हैं। बाबा बैजनाथ धाम को प्रदेश सरकार द्वारा बाबा बैजनाथ लोक के रूप में विकसित किया जा रहा है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्य करवाए जा रहे हैं। परिणाम स्वरूप बाबा बैजनाथ धाम मंदिर का भव्य रूप नजर आने लगा है। ऐसे पवित्र एवं पावन नगर में विराजित बाबा बैजनाथ को कोटि-कोटि वंदन प्रणाम। |