जीरन। शासकीय महाविद्यालय जीरन में पर्यावरण दिवस पर हरित परिसर के उद्देश्य से पौधारोपण कार्यक्रम "एक पेड़ मां के नाम" लगाने की शुरुआत की गई । यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया| कार्यक्रम का नेतृत्व प्राचार्य डॉ. हेमकांत तुगनावत ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. आशीष सोनी, प्रो. दिव्या खरारे, प्रो. गजेंद्र आर्य एवं अन्य प्राध्यापको,विद्यार्थियों ने नीम, अवंला, जामुन, सागवान इत्यादि प्रकार के पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
प्राचार्य डॉ. हेमकांत तुगनावत ने कहा कि वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया एवं महाविद्यालय में सभी के साथ इस अवसर पर चर्चा भी की गई |
पौधारोपण के पश्चात पौधों के नियमित संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प भी लिया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय परिसर को हरित एवं स्वच्छ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
विनोद सांवला हरवार
देश : शासकीय महाविद्यालय जीरन में हुई एक पेड़ माँ के नाम लगाने की शुरुआत
जीरन। शासकीय महाविद्यालय जीरन में पर्यावरण दिवस पर हरित परिसर के उद्देश्य से पौधारोपण कार्यक्रम "एक पेड़ मां के नाम" लगाने की शुरुआत की गई । यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया| कार्यक्रम का नेतृत्व प्राचार्य डॉ. हेमकांत तुगनावत ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. आशीष सोनी, प्रो. दिव्या खरारे, प्रो. गजेंद्र आर्य एवं अन्य प्राध्यापको,विद्यार्थियों ने नीम, अवंला, जामुन, सागवान इत्यादि प्रकार के पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
प्राचार्य डॉ. हेमकांत तुगनावत ने कहा कि वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया एवं महाविद्यालय में सभी के साथ इस अवसर पर चर्चा भी की गई |
पौधारोपण के पश्चात पौधों के नियमित संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प भी लिया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय परिसर को हरित एवं स्वच्छ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।