पेटलावद। वाग्धारा संस्था के तत्वावधान में पेटलावद ब्लॉक के ग्राम करंगढ़ में आयोजित स्वराज समागम ग्रामीण जागरूकता, सामुदायिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी मंच बन गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए देशी बीज संरक्षण, पर्यावरण अनुकूल परंपरागत खेती, पोषण सुरक्षा एवं आदिवासी स्वराज जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक संवाद किया।
कार्यक्रम का संचालन ब्लॉक फैसिलिटेटर मुकेश पोरवाल ने किया। उन्होंने वाग्धारा संस्था द्वारा समुदाय सशक्तिकरण एवं सतत विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए स्वराज समागम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस दौरान किसानों ने देशी बीजों के संरक्षण एवं उनकी भावी पीढ़ियों के लिए उपयोगिता पर गंभीर चर्चा की।
कार्यक्रम में मोहन भूरिया ने आदिवासी समाज की गौरवशाली हलमा परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे सामुदायिक सहयोग, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण एवं सामाजिक एकता का मजबूत आधार बताया। वहीं यूनिट लीडर धर्मेंद्र सिंह चुंडावत ने जल, जंगल, जमीन और जानवर को आदिवासी संस्कृति की जीवनरेखा बताते हुए इनके संरक्षण का संदेश दिया।
जमना बाई ने आदिवासी स्वराज संगठन द्वारा महिला नेतृत्व विकास, समुदाय सशक्तिकरण एवं स्थानीय संसाधनों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। तकनीकी सहयोग इकाई के मांगीलाल प्रजापत ने किसानों को पर्यावरण अनुकूल परंपरागत खेती, देशी बीजों और स्थानीय कृषि ज्ञान को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा, अतिवृष्टि एवं अल्पवृष्टि से खेती प्रभावित हो रही है, ऐसे में परंपरागत खेती ही स्थायी समाधान बन सकती है।
इम्प्लीमेंटेशन यूनिट हेड परमेश पाटीदार ने पोषण वाटिका, विविध आहार एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लुप्त होती परंपराओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता बताई।
अंत में ब्लॉक फैसिलिटेटर रेणुका पोरवाल ने देशी खेती, जैविक कीटनाशकों, बीज उपचार एवं पारंपरिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने देशी बीजों के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, सामुदायिक सहयोग की परंपराओं को मजबूत बनाने तथा स्वस्थ, आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर हुर्रा बाई भाभर, शांति बाई गामड़, नानिया डामोर, अमरू गामड़, राजू डामोर, प्रभु डामोर, हुरजी डामोर, हतु बाई डामोर, रमतु डामोर, मोनी बाई डामोर, बबली डामोर, राजू गरवाल सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सामुदायिक सहजाकर्ता काली भूरिया, गणेश पारगी, लीलावती सिंगाड़, अंगूर बाला सिंगाड़, श्यामा निनामा, प्रेमलता गामड़ एवं सोनू चारेल का विशेष योगदान रहा।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत