रतलाम : मध्य प्रदेश कांग्रेस में बड़ा सनसनीखेज फैसला सामने आया है। जिला कांग्रेस कमेटी रतलाम ने दो युवा नेताओं संजय रावल (ग्राम बिरमावल) और गौरव पोरवाल (ग्राम डेलनपुर) को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है।
जिला संगठन महासचिव जगदीश पाटीदार द्वारा जारी आदेश पत्र में दोनों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में दोनों ने अनुशासनहीनता का प्रदर्शन किया और पार्टी के सिद्धांतों, नियमों व अनुशासन को ठुकराया। इसके अलावा सोशल मीडिया पर लगातार कई दिनों तक पार्टी विरोधी पोस्ट कर संगठन को कमजोर करने और पार्टी की छवि धूमिल करने का काम किया गया।
पत्र में साफ लिखा गया है कि जिला अध्यक्ष हर्ष विजय गेहलोत के निर्देश पर और ब्लॉक अध्यक्ष दिलीप कुमावत की सहमति से यह कार्रवाई की गई है। निष्कासन का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।
जगदीश पाटीदार का सख्त रुख
आदेश पत्र में जगदीश पाटीदार ने लिखा ...संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करने और पार्टी हितों के विरुद्ध कार्य करने के कारण दोनों को 6 वर्षों के लिए निष्कासित किया जाता है। पत्र की प्रतिलिपि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, जिला प्रभारी रामवीर सिंह, जिलाध्यक्ष हर्ष विजय गेहलोत और ब्लॉक अध्यक्ष दिलीप कुमावत को भेजी गई है।
यह कार्रवाई कांग्रेस पार्टी के भीतर बढ़ती आंतरिक कलह और अनुशासनहीनता को लेकर सख्त संदेश देने वाली मानी जा रही है। खासकर जब प्रदेश स्तर पर संगठन को मजबूत करने की कोशिशें चल रही हैं, तब जिला स्तर पर ऐसे विद्रोही तत्वों को कड़ी सजा देकर पार्टी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि कोई भी अनुशासन भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में दोनों नेताओं ने कार्यक्रम के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की। प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में उनका व्यवहार पार्टी अनुशासन के खिलाफ था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्होंने पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठाते हुए पोस्ट डाले, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैली।
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह निष्कासन सिर्फ दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में अनुशासन बनाए रखने का बड़ा उदाहरण है। रतलाम कांग्रेस पहले से ही कुछ गुटबाजी की खबरों से जूझ रही थी। ऐसे में यह कदम पार्टी को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक माना जा रहा है।
इस निष्कासन के बाद रतलाम कांग्रेस में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। कई कार्यकर्ता इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं तो कुछ युवा कार्यकर्ता इसे “असहमति को कुचलने” की कोशिश बता रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर पार्टी ने इसे अनुशासन की जीत बताया है।
प्रदेश कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि जीतू पटवारी और हरीश चौधरी के नेतृत्व में संगठन को चाक-चौबंद करने की मुहिम चल रही है।
रतलाम का यह फैसला उसी मुहिम का हिस्सा है। आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस किसी भी प्रकार की आंतरिक कमजोरी बर्दाश्त नहीं करना चाहती।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत