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कृषि, अफीम, धार्मिक पर्यटन और आधुनिक विकास का संगम बना नीमच नीमच । मध्यप्रदेश के गौरवशाली जिलों में शामिल नीमच आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 6 जुलाई 1998 को तत्कालीन मंदसौर जिले से पृथक कर नीमच को स्वतंत्र जिले का दर्जा प्रदान किया गया। पिछले 28 वर्षों में जिले ने कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, धार्मिक पर्यटन और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। गौरवशाली इतिहास की विरासत नीमच का नाम North India Mounted Artillery and Cavalry Headquarters के संक्षिप्त रूप से बना माना जाता है। ब्रिटिश शासनकाल में यह एक महत्वपूर्ण सैन्य छावनी के रूप में विकसित हुआ। मालवा अंचल में स्थित यह जिला राजस्थान की सीमा से लगा होने के कारण मालवी और राजस्थानी संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। परमार, मुगल और मराठा शासन की ऐतिहासिक विरासत भी इस क्षेत्र की पहचान रही है। कृषि और अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव नीमच देश की प्रसिद्ध कृषि मंडियों में अपनी अलग पहचान रखता है। भारत सरकार की विश्वविख्यात अफीम एवं एल्कलॉयड फैक्ट्री यहां स्थित है, जो जिले की विशिष्ट पहचान है। गेहूं, सोयाबीन, चना, लहसुन और इसबगोल यहां की प्रमुख फसलें हैं। नीमच कृषि उपज मंडी लहसुन और इसबगोल के व्यापार के लिए एशिया की प्रमुख मंडियों में गिनी जाती है। आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र नीमच धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। भादवा माता मंदिर, सुखानंद धाम, आंतरी माता मंदिर, किलेश्वर महादेव मंदिर तथा बरूखेड़ा के प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं। विशेष रूप से भादवा माता धाम का निरंतर विकास और वहां हो रहे नवीन निर्माण कार्य धार्मिक पर्यटन को नई पहचान प्रदान कर रहे हैं। विकास की नई उड़ान हाल के वर्षों में जिले को अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की सौगात मिली है। पायलट ट्रेनिंग सेंटर और नवीन मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं भविष्य में जिले के विकास को नई गति देंगी। सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा नागरिक सुविधाओं के विस्तार में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। अमृत 2.0, प्रधानमंत्री आवास योजना और लाडली बहना योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में नागरिकों तक पहुंचा है। साथ ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी नीमच तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रशासनिक नेतृत्व जिले के गठन के साथ 6 जुलाई 1998 को श्री प्रभात कुमार पाराशर ने प्रथम कलेक्टर के रूप में नवीन जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत नींव रखी। वर्तमान में भारतीय प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारी श्री हिमांशु चंद्रा जिला कलेक्टर के रूप में विकास कार्यों को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। स्थापना दिवस का संदेश नीमच का स्थापना दिवस केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि का अवसर नहीं, बल्कि जिले की समृद्ध विरासत, विकास यात्रा और उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। यह दिन प्रत्येक नागरिक को जिले के सर्वांगीण विकास, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है। जिले के स्थापना दिवस पर समस्त नागरिकों को SSE NEWS परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं। आइए, हम सब मिलकर नीमच को और अधिक स्वच्छ, सुंदर, समृद्ध और विकसित बनाने का संकल्प लें। |