रतलाम / सरवन । रतलाम जिले के बहुचर्चित सराफा व्यवसायी गोलीकांड एवं आपराधिक षड्यंत्र मामले में एक ओर अदालत ने मुख्य आरोपी आदित्य सोमानी की प्रथम नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है, वहीं दूसरी ओर पूरे जिले में अब एक नया सवाल चर्चा का विषय बन गया है—आखिर पुलिस को अब तक वह बड़ा खुलासा क्यों नहीं मिला, जिसकी लंबे समय से उम्मीद की जा रही थी?
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आपराधिक षड्यंत्र के मामलों में आरोपी का घटनास्थल पर मौजूद होना आवश्यक नहीं होता। यदि साजिश पहले रची गई हो तो केवल घटना के समय जेल में होने के आधार पर आरोपी की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदित्य सोमानी की नियमित जमानत याचिका निरस्त कर दी।
अभियोजन के अनुसार 19 जून 2026 को थाना दीनदयाल नगर क्षेत्र में सराफा व्यवसायी कमल सोनी के घर के बाहर दो बदमाशों ने उनकी पत्नी मनीषा सोनी पर जानलेवा फायरिंग की थी। मनीषा समय रहते झुक गईं, जिससे गोली खिड़की का कांच तोड़ते हुए निकल गई और बड़ा हादसा टल गया। जांच के दौरान पुलिस ने विनीत उर्फ चुचु, भोला उर्फ मोनू, कन्हैयालाल उर्फ कान्हा, सिराज और अर्जुन सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में करीब एक करोड़ रुपये के लेनदेन के विवाद और 40 लाख रुपये की कथित सुपारी देकर गोलीकांड की साजिश रचने की बात सामने आई।
इधर सरवन थाना प्रभारी अर्जुन सेमलिया के नेतृत्व में दर्ज एमसीएक्स प्रकरण की जांच भी जारी है। पुलिस ने आदित्य सोमानी के मोबाइल, डिजिटल डाटा, बैंक खातों और यूपीआई ट्रांजेक्शन की फोरेंसिक जांच शुरू की है। साइबर टीम डिलीट किए गए डाटा को रिकवर करने का प्रयास कर रही है। पुलिस का दावा है कि मोबाइल से कई आईडी संचालित होने तथा करोड़ों रुपये के संदिग्ध डिजिटल लेनदेन के संकेत मिले हैं। जांच का दायरा सरवन, सैलाना, रतलाम, महिदपुर, उज्जैन और मंदसौर के कुछ व्यापारियों तक भी पहुंच चुका है।
हालांकि, यह भी तथ्य है कि अब तक जांच एजेंसियों ने किसी अंतिम निष्कर्ष या बड़ी बरामदगी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसी कारण आमजन और व्यापारिक वर्ग में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि चार दिन के पुलिस रिमांड के बाद भी आखिर ऐसा कौन-सा अहम सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा, जिसकी चर्चा पहले की जा रही थी? लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि डिजिटल डाटा, बैंक ट्रांजेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जारी है, तो अब तक कोई बड़ा खुलासा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक और साइबर जांच जारी है तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं। अब सभी को इंतजार है कि फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल जांच से आखिर कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होते हैं।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत