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वैसे तो अपने लंबे सेवाकाल में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ काम करने का अवसर और सौभाग्य मिला। सभी का स्नेह, प्रेम और सहयोग मिला, परंतु जीवन की अनमोल सीख एक युवा, समर्पित और कर्तव्यनिष्ठ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के साथ काम करके मिली। एक छोटे से गांव से, ग्रामीण परिवेश में पढ़ाई कर अपनी शासकीय सेवा प्रारंभ करने वाले मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को यह बताने वाला कोई नहीं था कि प्रोटोकॉल क्या होता है। आज तक किसी ने यह नहीं बताया कि प्रोटोकॉल शब्द का अर्थ क्या है। यह चीज क्या है। लोगों के साथ काम करते हुए जैसा देखा, वैसा ही अनुभव किया और उसे ही जीवन में उतारने का प्रयास किया। ऐसे में एक वरिष्ठ युवा प्रशासनिक अधिकारी ने मुझे जीवन की अनमोल सीख दी, जिसे मैंने अपने जीवन में आत्मसात किया और आज वर्षों बाद भी उस सीख को अपने जीवन में अमल में ला रहा हूं। एक दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की बैठक के दौरान जिले के मुखिया के रूप में पदस्थ उस युवा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने मुझे इशारा कर कहा कि अपने शर्ट के गले का पहला बटन लगाएं। उस इशारे को मैं समझ नहीं पाया, क्योंकि मैं जीवन में हमेशा इसे सहज मानता रहा था और हमेशा से ऐसे ही शर्ट पहनता रहा। जब मैंने शर्ट के गले का पहला बटन नहीं लगाया तो उन्होंने मुझे जीवन की अनमोल सीख दी। उन्होंने बताया कि अपने गले का पहला बटन अवश्य लगाएं। क्योंकि मुझे गले का पहला बटन लगाने की कभी आदत ही नहीं रही थी, इसलिए मैं अक्सर भूल जाया करता था और अज्ञानतावश उनके सामने गले का बटन खुला रखकर ही चला जाया करता था। कुछ दिनों बाद उन्होंने मुझे फिर टोका और समझाइश दी कि हमेशा अपने शर्ट के गले का बटन लगा कर रखा करो, यह ऑफिशियल मर्यादा के अनुरूप है। दूसरी बार कहने के बाद मुझे दिल से बहुत बुरा लगा कि मुझसे दोबारा यह गलती क्यों हुई। मैंने इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। जब भी घर से निकलता, सबसे पहले अपने गले का बटन चेक करता कि वह लगा है या नहीं। कुछ ही दिनों में यह आदत बन गई। उनकी दी हुई यह अनमोल सीख आज मेरे दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई है। अब यदि कभी जल्दबाजी में शर्ट के गले का पहला बटन लगाना भूल भी जाऊं, तो थोड़ी देर बाद ही एहसास हो जाता है कि मुझसे कोई भूल हुई है, और मेरा हाथ बरबस ही गले पर चला जाता है और खुला हुआ बटन अपने आप लग जाता है। इस अनमोल सीख ने मुझे एक अच्छी आदत सिखा दी है कि जब भी मैं घर से निकलता हूं, तो सबसे पहले अपनी शर्ट के सभी बटनों को चेक करता हूं और यदि कोई बटन खुला है तो उसे अवश्य लगाता हूं। ऐसी सीख देने वाले अधिकारी को बहुत-बहुत साधुवाद। जीवन में बुरे बुरे और गलत राह पर चलने की सीख देने वालों की तो कोई कमी नहीं है आज की दुनिया में। पर मैंने यह महसूस किया कि जीवन जीने का सही मार्ग बताने वाले वालो की कमी भी नहीं है इस दुनिया में। बस उन्हें पहचान वालों समझने वालों और उनके आदर्शों सिद्धांतों का अनुसरण करने वालों की कमी ही महसूस होती है जगदीश मालवीय आगर |