रतलाम / बिरमावल । जिले के ग्राम बिरमावल स्थित शासकीय श्री गोपालजी मंदिर को लेकर एक गंभीर शिकायत सामने आई है। मंदिर के पुजारी सनत कुमार द्विवेदी और उनके परिजनों के विरुद्ध मंदिर की संपत्ति पर कथित कब्जा करने, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, मंदिर की आय का निजी उपयोग करने तथा भगवान द्वारकाधीश की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति चोरी किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से कार्रवाई की मांग की गई है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी है और जांच कई महीनों से लंबित बताई जा रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए?
शिकायत के अनुसार, सनत कुमार पिता रमाकांत द्विवेदी की वर्ष 1992 में शासकीय श्री गोपालजी मंदिर में पुजारी के रूप में नियुक्ति हुई थी। उस समय उनकी उम्र करीब 47 वर्ष बताई गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वे उस दौरान भूमि विकास बैंक की धार शाखा में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे और सेवानिवृत्ति तक वहीं पदस्थ रहे। ऐसे में एक ही समय में बैंक की नौकरी और शासकीय मंदिर के पुजारी पद पर नियुक्ति को लेकर शासन से कथित तथ्य छिपाने तथा नियुक्ति की वैधानिकता की जांच की मांग की गई है।
मंदिर के आसपास शासकीय जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंदिर के आसपास स्थित शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर वर्ष 2020 में दो मंजिला पक्का भवन निर्मित किया गया। इसके अलावा मंदिर और मकान के सामने की जमीन को घेरकर पक्की बाउंड्रीवाल बनाने तथा मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते पर भी कब्जा करने का आरोप है। ने स्वामित्व योजना के दस्तावेजों में दर्ज भूमि के वास्तविक क्षेत्रफल और मौके पर मौजूद कब्जे का मिलान कर राजस्व सीमांकन कराने की मांग की है।
30 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर मंदिर का बाड़ा!
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू मंदिर की संपत्ति से होने वाली आय है। शिकायत के मुताबिक मंदिर का एक शासकीय बाड़ा छतरी मुंदड़ी रोड पर स्थित है। इसे पहले गांव के सत्यनारायण पिता बगदीराम राठौड़ को भैंसों के तबेले के लिए करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दिया गया था। आरोप है कि बाद में टीनशेड लगाकर इसे दुकान का स्वरूप दिया गया और पिछले करीब दो वर्षों से राकेश पिता बद्रीलाल प्रजापत को 30 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस किराये की राशि मंदिर के खाते में जमा होने के बजाय कथित रूप से निजी उपयोग में ली जा रही है।
इतना ही नहीं, मंदिर की बिरमावल में करीब 38 बीघा कृषि भूमि होने और उसे लीज पर देने से प्राप्त होने वाली राशि के हिसाब-किताब की भी जांच की मांग की गई है। सवाल है कि मंदिर की संपत्तियों से अब तक कितनी आय हुई
प्राण प्रतिष्ठित द्वारकाधीश मूर्ति गायब होने का सनसनीखेज आरोप
शिकायत का सबसे गंभीर आरोप मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को लेकर है। शिकायतकर्ता का दावा है कि करीब 22-23 वर्ष पूर्व यह मूर्ति मंदिर से गायब कर दी गई और इसे धार स्थित महावीर मार्ग, बनियावाड़ी के मकान नंबर 06 में स्थापित कर दिया गया। इस पूरे मामले में पुजारी के भाइयों और परिजनों की भूमिका की जांच कर मूर्ति की वास्तविक स्थिति तथा उसके स्थानांतरण से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कराने की मांग की गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच होना बाकी है।
175 दिन से सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस पूरे मामले में 13 मई 2026 को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 38295385 दर्ज कराई गई थी, जो शिकायत के मुताबिक 175 दिनों से लंबित है। वहीं ग्रामीण तहसीलदार स्तर पर भी करीब सात माह से जांच अटकी होने की बात कही गई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच को प्रभावित करने के लिए आसपास के लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है और गवाही देने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
अब कलेक्टर से मांग की गई है कि मंदिर की नियुक्ति संबंधी अभिलेख, राजस्व भूमि का सीमांकन, कथित अतिक्रमण, किराये की राशि, 38 बीघा कृषि भूमि की लीज से प्राप्त आय और मंदिर की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति के गायब होने के मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर शासकीय मंदिर की संपत्ति को सुरक्षित कराया जाए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि शासकीय मंदिर की संपत्ति से जुड़े इतने गंभीर आरोपों की जांच कब पूरी होगी और सरकारी जमीन तथा मंदिर की संपत्तियों का वास्तविक हिसाब आखिर कब सामने आएगा।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत