सरवन/रतलाम। दीपावली का त्योहार, बाजारों में खरीदारों का सैलाब और हर तरफ उत्साह का माहौल... लेकिन इसी रौनक के बीच रतलाम जिले के बड़ी सरवन में मंगलवार को लगे साप्ताहिक हाट बाजार की तस्वीर ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। दीपावली की खरीदारी के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच बाजार में न तो यातायात प्रबंधन प्रभावी नजर आया और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के पुख्ता इंतजाम दिखाई दिए। नतीजा यह रहा कि त्योहार की खुशियों के बीच आम लोगों को अव्यवस्था, धक्का-मुक्की और हंगामे का सामना करना पड़ा।
बाजार में पैर रखने की जगह नहीं, भीड़ ने बढ़ाई मुश्किलें
दीपावली की खरीदारी को लेकर मंगलवार को सरवन के साप्ताहिक हाट बाजार में जबरदस्त भीड़ उमड़ी। बाजार की मुख्य सड़कों से लेकर दुकानों के सामने तक खरीदारों का जमावड़ा लगा रहा। हालात ऐसे बन गए कि कई जगह लोगों को निकलने तक का रास्ता नहीं मिल रहा था। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी इसी भीड़ के बीच परेशान होते नजर आए। सवाल यह है कि जब दीपावली के मद्देनजर बाजार में इतनी बड़ी भीड़ जुटने की संभावना पहले से थी, तो भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए पहले से इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
आजाद चौक टंकी के पास अचानक गरमाया माहौल, विवाद और हाथापाई से मचा हड़कंप
बाजार की भीड़ और खरीदारी की गहमागहमी के बीच टंकी के पास अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया। यहां कुछ लोगों और युवकों युवतियाँ के बीच विवाद इतना बढ़ा कि तीखी बहस के बाद खींचतान और हाथापाई की स्थिति बन गई। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हालांकि विवाद की वास्तविक वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
त्योहार के बाजार में पुलिस की मौजूदगी पर बड़ा सवाल
सबसे गंभीर सवाल पुलिस व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर जब बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक भीड़ रहती है, तब संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की तैनाती, लगातार पेट्रोलिंग और यातायात नियंत्रण बेहद जरूरी होता है। इसके बावजूद सरवन के हाट बाजार में अव्यवस्था और विवाद की स्थिति सामने आना व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। आखिर इतनी बड़ी भीड़ के बीच निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या बाजार के लिए कोई विशेष सुरक्षा एवं यातायात प्लान तैयार किया गया था?
अब प्रशासन की जवाबदेही तय होगी या फिर सब कुछ सामान्य मान लिया जाएगा?
दीपावली का बाजार साल में एक बार आने वाले सबसे व्यस्त खरीदारी के अवसरों में शामिल है। ऐसे में आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सरवन की इस घटना ने साफ संकेत दिया है कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में केवल त्योहार से पहले निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि मौके पर प्रभावी अमल भी जरूरी है।
अब प्रशासन की जवाबदेही तय होगी या फिर सब कुछ सामान्य मान लिया जाएगा?
दीपावली का बाजार साल में एक बार आने वाले सबसे व्यस्त खरीदारी के अवसरों में शामिल है। ऐसे में आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सरवन की इस घटना ने साफ संकेत दिया है कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में केवल त्योहार से पहले निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि मौके पर प्रभावी अमल भी जरूरी है।
अब स्थानीय नागरिकों की निगाहें पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं। क्या वायरल वीडियो और बाजार की अव्यवस्था का संज्ञान लेकर जिम्मेदारों से जवाब मांगा जाएगा? क्या आगामी बाजारों में पुलिस बल की तैनाती, पेट्रोलिंग और यातायात व्यवस्था मजबूत होगी? या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी?
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत