रतलाम / नामली
मऊ-नीमच फोरलेन पर एक बार फिर खून से सनी सड़क का सिलसिला जारी है। गुरुवार रात पुलिस की लिखी कार (क्रमांक MP 09 AG 3339) ने लापरवाही से दौड़ते हुए एक ही परिवार के तीन सदस्यों को कुचल दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल 50 वर्षीय मुकेश पुत्र परमानंद कुमावत की शुक्रवार दोपहर इंदौर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में आग की लपटें भड़का दी हैं।
मृतक मुकेश कुमावत चाय पत्ती का छोटा व्यवसाय करते थे। गांव-गांव घूमकर परिवार का गुजारा चलाते थे। उनके साथ उनके चाचा 69 वर्षीय मांगीलाल और परिवार के ही 55 वर्षीय दूसरे मुकेश पुत्र किशनलाल भी हादसे का शिकार हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अनियंत्रित पुलिस कार ने पहले स्कूटी सवार मुकेश और मांगीलाल को टक्कर मारी, फिर कुछ दूरी पर पैदल जा रहे दूसरे मुकेश को भी चपेट में ले लिया। कार डिवाइडर से टकराकर रुकी। कार में वर्दीधारी एएसआई रैंक का पुलिसकर्मी, उसका बेटा (जो ड्राइविंग कर रहा था) और पत्नी सवार थे। हादसे के बाद तीनों फरार हो गए। बाद में स्वजनों ने कार को थाने पहुंचाया।
आक्रोश की आग: फोरलेन पर शव रखकर प्रदर्शन
मुकेश की मौत की खबर फैलते ही स्वजन और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। पलदुना फंटे पर फोरलेन किनारे टेंट-तंबू लगाकर धरना शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों ने लकड़ियां-कंडे मंगवा लिए और फोरलेन पर ही अंतिम संस्कार करने की चेतावनी दे डाली।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनातनी भी हुई। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
ग्रामीणों ने साफ कहा- "अब बस बहुत हुआ। पलदुना फंटे पर बीते एक साल में 10 से 12 मौतें हो चुकी हैं। कई युवा स्थाई रूप से अपंग हो चुके हैं।" सामाजिक कार्यकर्ता बंटी डाबी ने आरोप लगाया कि बार-बार आंदोलन और लिखित आवेदनों के बावजूद फोरलेन निर्माण कंपनी और प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। केवल खोखले आश्वासन दिए गए।
ब्लैक स्पॉट्स का सिलसिला
क्षेत्र में पांच प्रमुख ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं जहां हर दो-चार महीने में जानलेवा हादसे हो रहे हैं- पंचेड फांटा, पलदूना फांटा, गोकुल चौराहा, भदवासा फांटा और मंडी गेट। ग्रामीणों की मांग है कि सभी मृतकों के स्वजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए और दोषी पुलिसकर्मी व फोरलेन कंपनी पर सख्त कार्रवाई हो।
प्रशासनिक दौड़-धूप
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एएसपी विवेक कुमार, एडीएम शालिनी श्रीवास्तव, एसडीओपी किशोर पाटनवाला, एसडीएम विवेक सोनकर सहित अधिकारी मौके पर पहुंचे। MPRDC के अमित भूरिया भी उपस्थित रहे। देर रात तक समझाइश जारी रही। अंततः धरना समाप्त कर दिया गया।
12 दिनों का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने तीन प्रमुख मांगों को पूरा करने के लिए प्रशासन को 12 दिन का अल्टीमेटम दिया है। इन मांगों में गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर), हाई मास्ट लाइट की तत्काल स्थापना और दोषियों पर कार्रवाई शामिल है। अंतिम यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन आक्रोश अभी भी बरकरार है।
मुख्य प्रदर्शनकारी: बंटी डाबी, तूफान सिंह सोनगरा, राजेश भरावा, दिलीप सिंह सोलंकी, श्रीनाथ योगी, अजय जी जोकचंद, अभिषेक शर्मा समेत सर्व समाज के लोग मौजूद रहे।
अधिकारियों का बयान
एसडीएम विवेक सोनकर ने कहा, "कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई होगी। किसी को नहीं बख्शा जाएगा। अंतिम संस्कार फोरलेन पर नहीं होने देंगे।" थाना प्रभारी अमित कोरी ने बताया कि वाहन जब्त कर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
घटनास्थल पर MPRDC (मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की ओर से अधिकारी अमित भूरिया स्वयं पहुंचे और हालात का जायजा लिया। ग्रामीणों के गुस्से और लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए MPRDC ने मौके पर ही लिखित आश्वासन दिया कि फंटे पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जल्द ही प्रभावी और स्थायी कदम उठाए जाएंगे।
सवालों के घेरे में प्रशासन और कंपनी
यह हादसा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि डेढ़ महीने पहले जिला पंचायत सदस्य पवन जाट ने भी इसी फंटे पर कार्रवाई का आश्वासन लिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं- कब तक चलेगा यह मौत का खेल? कब तक सिर्फ आश्वासन दिए जाएंगे? फोरलेन निर्माण कंपनी की लापरवाही और पुलिस की लापरवाही अब सार्वजनिक बहस का विषय बन गई है।
ग्रामीणों का आक्रोश जायज है। सड़क विकास के नाम पर अगर आम आदमी की जान सस्ती हो गई है तो यह विकास नहीं, हत्यारा विकास है। 12 दिन का अल्टीमेटम अब प्रशासन के लिए परीक्षा का समय है। अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो पलदुना फंटा फिर से उबल सकता है।
नामली सै रिपोर्ट- विजय सिंह राठौर
Crime reporter Jitendra Kumawat