रतलाम / सैलाना
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में स्थित ऐतिहासिक श्री रामद्वारा अब घोटाले का सबसे गर्मागर्म केंद्र बन गया है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, सनातन परंपरा और सरकारी शासकीय भूमि को निजी स्वार्थ के लिए लूटने का संगठित षड्यंत्र सामने आने के बाद पूरा सैलाना आक्रोश में है। पूर्व महंत स्व. श्री निर्मलरामजी महाराज की गादी संभालने वाले रामविलास शास्त्री पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने रामद्वारा की 1880 वर्गफीट की बहुमूल्य संपत्ति को मात्र 20 लाख रुपये में बेच दिया, जबकि इसकी असली कीमत करोड़ों में है।
नगर परिषद सैलाना पहले ही इस फर्जी नामान्तरण को रद्द कर चुका है, लेकिन अब शिकायतकर्ताओं ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (तहसीलदार कुलभूषण शर्मा) एवं सैलना थाना प्रभारी (थाना प्रभारी पिंकी आकश ) को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की है। स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और सनातन धर्म के समर्थकों की भारी भीड़ में दिया गया यह ज्ञापन पूरे मामले को नया मोड़ दे रहा है।
रामद्वारा: सैलाना की आस्था का केंद्र
सैलाना क्षेत्र के लिए श्री रामद्वारा सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। स्थानीय निवासियों की रामद्वारा से गहरी लगाव की परंपरा रही है। हर छोटे-बड़े आयोजन, सामाजिक कार्यक्रम, विवाह-शादी और पारिवारिक उत्सव में रामद्वारा के दर्शन किए बिना शुभारंभ या समापन अधूरा माना जाता है।
स्वर्गीय महंत श्री निर्मलरामजी महाराज के समय रामद्वारा पूर्ण रूप से सक्रिय था। पूर्णिमा, रामनवमी, हनुमान जयंती, नवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां धूमधाम रहती थी। हजारों श्रद्धालुओं को भंडारा और प्रसादी वितरित की जाती थी। संत मंडलियां यहां आकर ठहरती थीं। प्रार्थी मदनलाल कुमावत और पन्नालाल कुमावत खुद को रामद्वारा के भक्त बताते हुए कहते हैं कि उनके पिता के समय से वे रामद्वारा के दीक्षित हैं और लगभग रोज दर्शन करने जाते हैं।
महंत के निधन के बाद शुरू हुआ खेल
शिकायत के अनुसार, महंत श्री निर्मलरामजी के ब्रह्मलीन होने के बाद स्थिति बिगड़नी शुरू हो गई। उनकी समाधि का निर्माण किया गया, लेकिन आरोप है कि प्रतिवादियों ने उसे तोड़-फोड़कर हटा दिया, जिससे भक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुंची। रामविलास शास्त्री को गादी पर बिठाए जाने के बाद रामद्वारा की संपत्ति का लगातार दुरुपयोग शुरू हो गया।
मुख्य आरोपों की फेहरिस्त:
अवैध दुकानें और किराया वसूली: मुख्य मार्ग की ओर 10 से अधिक दुकानें बनाई गईं। दानदाताओं की राशि से बनी इन दुकानों से लाखों रुपये पगड़ी और हजारों रुपये मासिक किराया वसूला जा रहा है, लेकिन इसका कोई हिसाब-किताब भक्तों या रामद्वारा की व्यवस्था में पेश नहीं किया जा रहा।
आय का दुरुपयोग: प्राप्त धन का उपयोग न तो भंडारे, प्रसादी, न ही मंदिर की देखभाल में हो रहा है। व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ हो गई है।
आपत्ति पर धौंस-धमकी: जब कोई भक्त या श्रद्धालु हिसाब मांगता है तो रामविलास शास्त्री धमकी देते हैं और जानकारी देने से बचते हैं।
सबसे बड़ा फ्रॉड 1880 वर्गफीट संपत्ति का फर्जी विक्रय
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि रामद्वारा परिसर के 50 वर्ष पुराने भवन (लगभग 1880 वर्गफीट) को फर्जी तरीके से बेच दिया गया। यह भवन संत मंडलियों के ठहरने के लिए इस्तेमाल होता था।
इस खेल मे बड़ी भूमिका
रामविलास शास्त्री (प्रतिवादी नंबर 1) — मुख्य, संपत्ति बेचने वाला
कृष्णा कुंवर गौर (बहन) — सहमति देने वाली
दिलीप सिंह गौर (भांजा) — गवाहों के साथ मिलकर प्रक्रिया पूरी करने वाला
जितेन्द्र प्रजापत (क्रेता, रतलाम) — खरीददार
जयप्रकाश बैरागी — अन्य
यह सौदा 25 दिसंबर 2024 को (बड़े दिन के सरकारी अवकाश के दिन) गुपचुप तरीके से पंजीकृत कराया गया। दस्तावेज में कीमत मात्र 20 लाख रुपये (चेक + नगद) बताई गई, जबकि मुख्य मार्ग पर स्थित इस संपत्ति की बाजार कीमत करोड़ों रुपये है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह undervaluation का स्पष्ट मामला है।
नगर परिषद की सख्त कार्रवाई
इस फर्जी सौदे के बाद जितेन्द्र प्रजापत ने नगर परिषद सैलाना में नामान्तरण का आवेदन किया। परिषद ने 29 अगस्त 2025 को अपनी बैठक में मामले की जांच की और 8 सितंबर 2025 को पत्र क्रमांक 2222/न.प./25 जारी कर नामान्तरण को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
परिषद के आदेश में साफ लिखा है
यह संपत्ति 1982 से रामद्वारा के नाम दर्ज है।
2009 से रामविलास शास्त्री केवल व्यवस्थापक के रूप में दर्ज हैं, स्वामी नहीं।
सर्वे नंबर 603, रकबा 0.090 हेक्टेयर — मध्य प्रदेश शासन की शासकीय भूमि है।
किसी भी निजी व्यक्ति को इसे बेचने का अधिकार नहीं।
सनातन परंपरा का उल्लंघन
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि संत परंपरा में दीक्षा लेने के बाद साधु की सिविल डेथ मानी जाती है। ऐसे में रामविलास शास्त्री द्वारा गुरु का नाम लेकर स्वयं को मालिक बताना और संपत्ति बेचना गंभीर कानूनी और धार्मिक उल्लंघन है।
कानूनी कार्रवाई की मांग
मदनलाल और पन्नालाल कुमावत ने पुलिस से मांग की है कि आरोपीयों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए। मांगी गई धाराएं:
भारतीय न्याय संहिता (BNS/BNSS):
316(3), 316(5), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61
पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC):
406 (आमानत में खयानत), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज), 120-ब (आपराधिक षड्यंत्र)
शिकायतकर्ता चाहते हैं कि सभी दस्तावेज जब्त किए जाएं, आरोपी गिरफ्तार हों और उन्हें कड़ी सजा मिले।
स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश
सैलाना के लोग अब खुलकर बोल रहे हैं। कई वरिष्ठ नागरिकों ने कहा, “यह सनातन धर्म की लड़ाई है। कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए मंदिर की संपत्ति पर कब्जा जमाना चाहते हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” महिलाओं ने भी ज्ञापन सौंपने के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कहा कि रामद्वारा उनकी आस्था का केंद्र है।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन और राजस्व विभाग पर टिकी हैं। क्या पुलिस इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करेगी? क्या आय-व्यय की पूरी जांच होगी? क्या 20 लाख रुपये की राशि का हिसाब सामने आएगा?
यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं है। यह धार्मिक आस्था, सरकारी भूमि की सुरक्षा और महंत परंपरा की गरिमा का सवाल है।
अगर ऐसे घोटाले रुक नहीं पाए तो आने वाले समय में अन्य धार्मिक स्थलों पर भी इसी तरह के खतरे मंडराएंगे।
Crime reporter Jitendra Kumawat