रतलाम
रतलाम शहर में 29 मई की रात दिलबहार चौराहे पर हुई एक घटना को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कुछ पुलिसकर्मियों पर मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने, गाली-गलौज करने और पार्टी कार्यकर्ताओं को झूठे प्रकरणों में फंसाने की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। यह ज्ञापन शुक्रवार पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक लाल को सौंपा गया।
ज्ञापन में भाजपा कार्यकर्ताओं ने बताया कि 29 मई की रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच पार्टी कार्यकर्ता सौरभ शर्मा अपने साथियों के साथ दिलबहार चौराहे पर संगठनात्मक चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान वहां पहुंचे पुलिसकर्मी विजय बामनिया एवं अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से भाजपा कार्यकर्ताओं से अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री को लेकर भी आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, जिसका विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी।
भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विरोध दर्ज कराने पर सौरभ शर्मा को जबरन वाहन में बैठाकर स्टेशन रोड थाने ले जाया गया। घटना की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता थाने पहुंच गए और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उस समय थाना प्रभारी द्वारा अगले दिन शिकायत लेने का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने का आरोप भी ज्ञापन में लगाया गया है।
सौरभ शर्मा का कहना है कि उन्होंने न तो किसी पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई की और न ही किसी प्रकार का हंगामा किया। उनका आरोप है कि अब उन्हें और उनके साथियों को शासकीय कार्य में बाधा सहित अन्य मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया है।
वहीं, मामले के जांच अधिकारी उपनिरीक्षक मुकेश सस्तिया का कहना है कि पुलिस के पास घटना के वीडियो फुटेज उपलब्ध हैं और तीन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों द्वारा गाली-गलौज और हंगामा किया गया था तथा कार्रवाई पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित पुलिसकर्मियों के आचरण की समीक्षा की जाए तथा पार्टी कार्यकर्ता सौरभ शर्मा के विरुद्ध बिना ठोस आधार के किसी भी प्रकार की कार्रवाई न की जाए।
अब यह मामला केवल पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन पहुंचने के बाद इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी नजरें टिक गई हैं। आने वाले दिनों में जांच और विभागीय कार्रवाई की दिशा इस पूरे विवाद की तस्वीर साफ करेगी।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत