रतलाम। पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों को बचाने के लिए रतलाम की समाजसेवी रेणुका पोरवाल द्वारा शुरू की गई मुहिम अब असर दिखाने लगी है। पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से निर्मित प्रतिमाओं के निर्माण, विक्रय और प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जन पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा जिला कलेक्टर को भेजे गए पत्र पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आधिकारिक रूप से संज्ञान लिया है।
बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पी. सी. उचारिया द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि रेणुका पोरवाल के 25 जून 2026 के ई-मेल के संदर्भ में मामले का परीक्षण किया गया। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के प्रकरण क्रमांक 673/2018 में 21 सितंबर 2018 को पारित आदेश तथा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 12 मई 2020 को जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुरूप मध्य प्रदेश में प्रतिमा विसर्जन संबंधी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
बोर्ड ने अपने जवाब में कहा है कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों, मूर्तिकारों और संबंधित विभागों को सीपीसीबी की गाइडलाइन का पालन कराने के निर्देश दिए जाते हैं। साथ ही पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं के उपयोग, निर्धारित विसर्जन स्थलों के चयन और जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई भी कराई जाती है।
गौरतलब है कि रेणुका पोरवाल ने अपने पत्र में कहा था कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सरकार जहां नदियों, तालाबों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चला रही है, वहीं पीओपी से बनी प्रतिमाओं का विसर्जन इन प्रयासों को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया था कि पीओपी पानी में आसानी से नहीं घुलती और प्रतिमाओं में उपयोग होने वाले रासायनिक रंग व पेंट जल को प्रदूषित कर जलीय जीवों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
रेणुका पोरवाल ने पूरे प्रदेश में पीओपी प्रतिमाओं पर एक समान नीति लागू करने, मिट्टी, गोबर और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बनी पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा देने तथा प्रतिमा निर्माताओं को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भेजे गए जवाब को इस जनहित अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी त्योहारों के दौरान प्रदेशभर में पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा देने और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए दिशा-निर्देशों का कितना प्रभावी पालन कराया जाता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत